नवभारत संपादकीय: देश में कितनी राजनीतिक पार्टियां होनी चाहिए? कागजी दलों के पंजीकरण पर उठे सवाल

Political Parties: भारत में राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय दलों के साथ बड़ी संख्या में पंजीकृत राजनीतिक पार्टियां हैं। ऐसे में छोटे या निष्क्रिय दलों के पंजीकरण पर मिलने वाली कर छूट को लेकर सवाल उठते हैं।
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राजनीतिक पार्टियांफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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Political Party Registration India: देश में कितनी राजनीतिक पार्टियां होनी चाहिए, इसका न कोई निश्चित पैमाना तय किया जाए तो उचित होगा। आबादी के लिहाज से भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें पार्टियों का कोई नियोजन ही नहीं हो। अवश्य ही राष्ट्रीय पार्टियों और राज्यस्तरीय क्षेत्रीय दलों की विशिष्ट भूमिका है, जो वास्तव में जनप्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन उन दर्जनों बोगस पार्टियों की वैधता क्या है, जिनका कोई जमीनी आधार नहीं है? ऐसी कागजी पार्टियों का प्रयोजन ही क्या है? जानना जरूरी है कि इस तरह की पार्टियां क्यों बनाई जाती हैं और उनका उद्देश्य क्या है? हमारा निर्वाचन संबंधी कानून पार्टियों को पंजीयन कराने का अधिकार देता है।

इस लोकतांत्रिक छूट का लाभउठाते हुए ऐसी बोगस पार्टियां अस्तित्व में आ जाती हैं, जिनका किसी ने कभी नाम तक नहीं सुना होगा। देश में 6 राष्ट्रीय स्तर की 60 राज्य स्तर की तथा लगभग 2,000 अन्य पंजीबद्ध पार्टियां हैं। हकीकत यह है कि कानून के मुताबिक राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को इनकम टैक्स से छूट मिलती है।

राजनीतिक दलों पर 1,870 करोड़ के फर्जी चंदे का आरोप

इस प्रावधान का फायदा उठाने के लिए चालाक किस्म के लोग राजनीतिक पार्टी बना लेते हैं जिनकी वास्तव में कोई लोकप्रियता, जनाधार या पहचान नहीं होती। इन पार्टियों की आड़ में ब्लैक मनी व्हाइट किए जाने का गोरखधंधा किया जाता है। इनकम टैक्स विभाग की शिकायत पर एक्शन लेते हुए गुजरात पुलिस ने 3 गैर मान्यता प्राप्त, लेकिन पंजीकृत राजनीतिक दलों और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज की।

इन दलों के नाम हैं, भारतीय नेशनल जनता दल, स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी तथा गरीब कल्याण पार्टी। आरोप है कि इन पार्टियों ने लगभग 1,870 करोड़ रुपये का बोगस चंदा दिखाया तथा फर्जी (शेल) कंपनियों, जाली बिलों और चार्टर्ड अकाउंटेंट की मिलीभगत से 4 से 10 फीसदी कमीशन काटकर अपने कथित दानदाताओं को उनकी रकम नकद वापस लौटा दी।

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औपचारिकता या दिखावे के लिए यह तीनों पार्टियां 2017 से चुनाव लड़ती आ रही थीं और उनके हर प्रत्याशी की जमानत जब्त हो जाती थी। न उनकी कोई राजनीतिक पहचान थी, न कोई गतिविधि। इधर-उधर का खर्च दिखाकर टैक्स की हेराफेरी और काले धन को सफेद करने की उनकी गहरी चाल थी। यह उनका बिजनेस था।

सबसे बड़ा घोटाला भारतीय नेशनल जनता दल ने किया। उसे 56,238 दानदाताओं से 1,143.85 करोड़ रुपये का चंदा हासिल होता दिखाया गया। स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी ने 519 करोड़ का चंदा दिखाकर 155 करोड़ रुपये टैक्स की हेराफेरी की। गरीब कल्याण पार्टी का भी गरीबों से कोई लेना-देना नहीं था। उसने 206.76 करोड़ का चंदा दर्शाते हुए 6.2 करोड़ के टैक्स की हेराफेरी की। यह पार्टियां पैसा मिलने के बाद उस रकम को अस्तित्वहीन शेल कंपनियों को ट्रांसफर करती थीं। इसके बाद फर्जी बिल बनाए जाते थे।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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