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Navabharat Nishanebaaz: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, अमेरिका के हमलावर राष्ट्रपति ट्रंप को यदि ईरानियों से शांति वार्ता करनी थी तो पाकिस्तान को बिचौलिया बनाने की बजाय भारत की मदद लेते। उन्हें शायद पता नहीं कि भारत ही विश्व का सबसे बड़ा शांतिप्रिय देश है, जहां फिल्मों में भी ओम शांति ओम का गीत गूंजता है। यहां शांतिलाल और शांतिबाई जैसे लोग मिल जाएंगे। मशहूर डायरेक्टर वी। शांताराम का नाम कीन नहीं जानता। राजा शांतनु के खानदान में भी महाभारत होकर रहा।’
हमने कहा, ‘अपनी बात सही तरीके से रखिए, भारत सरकार ट्रंप को बता सकती है कि भगवान महावीर, गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी ने दुनिया को शांति, करुणा और सद्भावना का संदेश दिया था। हमारे प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू विश्व शांति के प्रबल समर्थक थे। वह हर स्वाधीनता दिवस समारोह में शांति के प्रतीक कबूतर उड़ाया करते थे। हमारे अनुष्ठानों में शांति पाठ पढ़ा जाता है, जिसमें पृथ्वी से लेकर अंतरिक्ष तक शांति की कामना की गई है। हम सभी की सुख-शांति के लिए कहते हैं- सर्वे सुखिना भवंतु, सर्वे संतु निरामयः सर्वे भद्राणि पश्यंतु, मा कश्चिद दुख भाग्भवेत।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, भारत शांति के लिए नैतिक और धार्मिक उपदेश दे सकता है लेकिन पाकिस्तान जैसी दलाली नहीं कर सकता। यदि ट्रंप को मोदी जैसा मेडिटेशन करना आता तो वह शांति का अर्थ समझते। डोनाल्ड ट्रंप को सम्राट अशोक के बारे में बताया जाना चाहिए, जिन्होंने कलिंग (ओडिशा) पर आक्रमण किया था। वहां हुए भीषण नरसंहार और लाखों लोगों के खून की नदियां देखकर उनका मन अत्यंत विचलित हुआ तो उन्होंने शांति की सीख देने वाले बौद्ध धर्म को अपना लिया।’
हमने कहा, ‘इतनी पुरानी मिसाल मत दीजिए, यह बताइए कि इस समय ट्रंप ईरानियों से शांति वार्ता कैसे और कहां करें?’
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पड़ोसी ने कहा, ‘यदि ट्रंप को सीधे आमने-सामने शांति वार्ता करनी है तो भारत चले आएं। महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्प चढ़ाने के बाद सीधे बॉलीवुड जाएं, वहां बोमन ईरानी, अरुणा ईरानी, डेजी ईरानी के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री और टीवी सीरियल अभिनेत्री स्मृति ईरानी से शांति वार्ता कर सकते हैं। यहां ईरानियों की कोई कमी नहीं है।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा