नवभारत विशेष: इटली और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, अंतरिक्ष, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी में सहयोग
India Italy Trade: भारत-इटली व्यापार साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब यूरो से आगे ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
भारत, प्रधानमंत्री,नरेंद्र मोदी, इटली, प्रधानमंत्री, जॉर्जिया मेलोनी (सोर्स: सोशल मीडिया)
India Italy Economic Partnership: हम इटली की डिजाइन क्षमता, बेहतरीन विनिर्माण कौशल और विश्वस्तरीय सुपरकंप्यूटर तकनीक को भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, इंजीनियरिंग प्रतिभा, बड़े पैमाने की क्षमता, नवाचार और 100 से अधिक यूनिकॉर्न तथा 2 लाख स्टार्ट-अप वाले उद्यमी इकोसिस्टम के साथ जोड़कर एक शक्तिशाली तालमेल बनाना चाहते हैं। यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों दिशाओं में व्यापार और निवेश बढ़ाने का रास्ता खोलता है। हमारा लक्ष्य 2029 तक भारत और इटली के बीच व्यापार को 20 अरब यूरो से आगे ले जाना है।
इसमें रक्षा एवं एयरोस्पेस, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, मशीनरी, ऑटोमोबाइल पुर्जे, रसायन, दवाइयां, वस्त्र, कृषि-खाद्य क्षेत्र और पर्यटन समेत कई क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रहेगा। ‘मेड इन इटली’ हमेशा से दुनिया भर में उत्कृष्टता का प्रतीक रहा है और आज इसका स्वाभाविक तालमेल ‘मेक इन इंडिया’ पहल के उच्च गुणवत्ता वाले लक्ष्यों के साथ दिखाई देता है। इसी संदर्भ में भारत के लिए उत्पादन में इतालवी कंपनियों की बढ़ती रुचि और इटली में भारतीय उद्योगों की बढ़ती मौजूदगी, जो अब दोनों पक्षों से मिलाकर 1000 से अधिक हो चुकी है, एक सकारात्मक संकेत है।
तकनीको नवाचार हमारी साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। आने वाले दशकों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्वांटम कंप्यूटिंग, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिज और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में तेज रगति होगी। भारत का तेजी से बढ़ता नवाचार तंत्र और कुशल पेशेवरों की बड़ी संख्या तथा इटली की उन्नत औद्योगिक क्षमता इन क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग को स्वाभाविक बनाती है। भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) पहले से ही दुनिया के कई देशों, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
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विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आज हमारे समाज और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल रही है। इटली और भारत लंबे समय से इस दिशा में सहयोग कर रहे हैं ताकि एआई का विकास जिम्मेदार और मानव-केंद्रित हो। हमारा दृष्टिकोण भारत की विशाल डिजिटल क्षमता को इटली की नैतिक और औद्योगिक विशेषज्ञता के साथ जोड़ता है, ताकि तकनीक मानव गरिमा की सेवा कर सके। हम एक ऐसा खुला, भरोसेमंद और समान डिजिटल वातावरण बनाना चाहते हैं, जिसमें हर देश एआई का उपयोग कर सके और उससे लाभ उठा सके।
यही सोच इटली की जी? अध्यक्षता और 2026 में दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के निष्कर्षों का मुख्य आधार है। हमारा सहयोग अंतरिक्ष क्षेत्र तक भी फैला हुआ है। अंतरिक्ष अनुसंधान और सैटेलाइट तकनीक में भारत की उल्लेखनीय प्रगति तथा इटली की एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में उत्कृष्टता, संयुक्त परियोजनाओं और नई पीढ़ी की तकनीकों के विकास के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है। हम अपने साझा चुनौतियों का समाधान दोनों देशों के गहरे संबंधों और लंबे सांस्कृतिक जुड़ाव के आधार पर कर सकते हैं।
भारतीय संस्कृति में ‘धर्म’ का विचार उस जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है, जो हमारे कार्यों का मार्गदर्शन करना चाहिए, वहीं ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का सिद्धांत आज के आपस में जुड़े डिजिटल युग में और भी अधिक प्रासंगिक लगता है। ये मूल्य इटली की मानवतावादी परंपरा से भी मेल खाते हैं, जिसकी जड़ें पुनर्जागरण काल में हैं। हमारी साझा दृष्टि का उद्देश्य लोगों को केंद्र में रखते हुए भारत-इटली साझेदारी को मजबूत, आधुनिक और भविष्य उन्मुख आधार प्रदान करना है।
व्यापार, अंतरिक्ष, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी में सहयोग
भारत और इटली के संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी से विस्तार हुआ है। यह संबंध केवल सौहार्दपूर्ण मित्रता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब स्वतंत्रता और लोकतंत्र के मूल्यों तथा भविष्य के साझा दृष्टिकोण पर आधारित एक विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं।
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सहयोग इस साझा समझा को दर्शाता है कि 21वीं सदी में समृद्धि और हमारा सुरक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि देश कितनी क्षमता से नवाचार करें, ऊर्जा परिवर्तन का प्रबंधन करें और अपनी रणनीतिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करें। इसी उद्देश्य से हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा बनाने का संकल्प लिया है।
लेख- डॉ. अनिता राठौर के द्वारा
