नवभारत विशेष: अब हमसे एकतरफा उदारता की उम्मीद न करे विश्वासघाती देश, सिंधु जल संधि रोकने का भारत को पूरा हक
अब पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान को जाने से रोक देने का उचित फैसला किया है। 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के बीच संधि हुई थी।
- Written By: दीपिका पाल
सिंधु जल संधि रोकने का भारत को पूरा हक (सौ.सोशल मीडिया)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पाकिस्तान ऐसा एहसान फरामोश देश है। है जो भारत की सज्जनता का हमेशा गैरवाजिब फायदा उठाता रहा है. 1993 के सीरियल ब्लास्ट, 2001 में संसद पर हमला, 2008 में मुंबई पर आतंकी हमला, 2013 में उरी पर हमला, 2019 में पुलवामा अटैक चीख-चीख कर पाकिस्तानी दरिंदेपन की मिसाल पेश कर रहे हैं। अब पहलगाम में 26 पर्यटकों की आतंकियों द्वारा हत्या के बाद भारत ने सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान को जाने से रोक देने का उचित फैसला किया है।1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने इस सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे. यह भारत की पाक के प्रति असाधारण उदारता थी।
भारत ने अपनी सिंचाई सीमित रखते हुए पाकिस्तान को बड़ी मात्रा में पानी देने की उदारता दिखाई थी। इसके पीछे उम्मीद यही थी कि इससे आपसी सहयोग और स्थायित्व का माहौल बनेगा लेकिन पाकिस्तान ने 1965, 1971 व 1999 कारगिल हमले से इसका जवाब दिया।हमने उसे पानी दिया और उनसे हमारे लोगों का खून बहाया. पहलगाम में देश के अनेक राज्यों से गए पर्यटकों का हैवान आतंकवादियों ने जिस तरह नरसंहार किया उसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु नदी जल समझौते को स्थगित करने का निर्णय लिया है. यह सिर्फ पानी का नहीं बल्कि हमारी संप्रभुता और अपने देश के हितों की रक्षा का मामला है। बार-बार हमले करनेवाला विश्वासघाती देश अब हमसे एकतरफा उदारता की उम्मीद न करे।
अमेरिका ने भी समझौते तोड़े थे
इतिहास में संधियां होती और टूटती रही हैं. अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए एकपक्षीय तौर पर एंटी बैलेस्टिक मिसाइल ट्रीटी 2002 में तोड़ी थी. उसके बाद 2019 में इंटरमीजिएट रेंज न्यूक्लीयर फोर्सेस संधि तोड़ी. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हुए विएना समझौते का अनुच्छेद 60 किसी पक्ष द्वारा गलत कदम उठाने पर संधि से पीछे हटने का अधिकार देता है। अंतरराष्ट्रीय कानून भी इसकी अनुमति देता है. भारत इस संघि को ठंडे बस्ते में डाल रहा है. यह पाकिस्तान को सख्त चेतावनी है कि वह अब भी सुधर जाए। भारत ने अपने बांधों की जमा मिट्टी (गाद) निकालकर उनकी जलभंडारण क्षमता बढ़ाने, नदियों को गहरा करने का लक्ष्य रखा है ताकि सिंधु नदी का पानी वहां ले जाकर सिंचाई में वृद्धि की जाए. नदी जोड़ो योजना पर भी आगे बढ़ा जाएगा। नई जल विद्युत परियोजनाएं शुरू की जाएगी. दगाबाज पाकिस्तान को जा रहा सिंधु नदी का पानी रोका जाएगा तभी उसे अक्ल आएगी।
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कश्मीर को पानी मिल सकेगा
पाक अपनी 80 प्रतिशत पानी की जरूरत के लिए सिंधु नदी पर निर्भर है. उसका पानी नहीं मिलने से पाकिस्तान की गेहूं, धान, कपास व गन्ने की खेती पर बुरा असर पड़ेगा. खाद्यान्न कीमतें बढ़ेगी और आयात पर निर्भर रहना पड़ेगा. पंजाब व सिंध प्रांतों में पेयजल का संकट उत्पन्न हो जाएगा. पाकिस्तान की जीडीपी में 25 प्रतिशत सहभाग कृषि का है. अब तक करार की वजह से कश्मीर न तो खेती के लिए पानी रोक सकता था न जलविद्युत प्रकल्प बना सकता था. सिंधु जलसंधि की वजह से जम्मू-कश्मीर को प्रति वर्ष 8,000 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है।
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चीन का एकपक्षीय रवैया
चीन ने अपनी नदियों में बहते जल को लेकर किसी दक्षिणी पड़ोसी से जल-बंटवारा संधि नहीं की है. वह ब्रम्हपुत्रा नदी पर सुपर डैम बना रहा है जो दुनिया का सबसे बड़ा और ऊंचा बांध होगा. यदि कभी उसने इसका पानी पूरी तरह छोड़ा अथवा वहां भूकंप आया तो जल प्रलय हो सकता है, यद्यपि भारत रक्षा बजट व अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में पाकिस्तान पर भारी पड़ता है लेकिन पाकिस्तान ने भारत के प्रति गहरी नफरत और आतंकवाद को अपना नीति बना रखा है. पाकिस्तानी जनरल आसिम मुनीर ने इसे 2 सभ्यताओं का मुद्दा बताते हुए कहा कि हिंदू-मुसलमान का रहनसहन, रीतिरिवाज, परंपरा, मजहब बिल्कुल अलग है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
