-
शुक्र, 3 जुलाई 2026 ई-पेपर
- Hindi News »
- Special Coverage »
- Formula Of Throwing Sweets And Winning The Election Is In Vogue In Electoral Democracy
चुनावी लोकतंत्र का बड़ा सचः दिल खोलकर रेवड़ी फेंको चुनाव जीतो का चला फार्मूला
- Written By: दीपिका पाल
झारखंड, महाराष्ट्र और हरियाणा तीनों जगह सत्ताधारी दलों ने राजकोष का दिल खोलकर इस्तेमाल किया और मतदाताओं को अपने पाले में करने में सफलता हासिल कर ली। इन तीनों राज्यों में छह माह पूर्व राजनीतिक परिदृश्य एंटी इन्कंबेंसी का था।

दिल खोलकर रेवड़ी फेंको चुनाव जीतो का चला फार्मूला (सौ.डिजाइन फोटो)
नवभारत डेस्क: चुनावी लोकतंत्र का इन दिनों सबसे बड़ा सच है, रेवड़ी फेंको, चुनाव जीतो झारखंड, महाराष्ट्र और हरियाणा तीनों जगह सत्ताधारी दलों ने राजकोष का दिल खोलकर इस्तेमाल किया और मतदाताओं को अपने पाले में करने में सफलता हासिल कर ली। इन तीनों राज्यों में छह माह पूर्व राजनीतिक परिदृश्य एंटी इन्कंबेंसी का था, लेकिन मतदान का दिन आते आते यह प्रो इन्कंबेंसी में तब्दील हो गई। अब लोकलुभावनवाद और खजाना लुटावनवाद की राजनीति ने बड़ी मजबूती से अपने पैर जमाने शुरू कर दिये हैं। तमिलनाडु में ननाडु में कभी साड़ी, कभी जेवरात। कभी-कभी मोबाइल बांटने की बातें हुई।
नीतीश कुमार ने बिहार में लड़कियों को साइकिलें बांटी थीं। इसके पहले कई राज्य सरकारों द्वारा किसानों की कर्ज माफी का भी चुनाव जीतने के लिए इस्तेमाल किया गया। दिल्ली में आप द्वारा एक सीमा तक मुफ्त बिजली, पानी और बाद में महिलाओं के मुफ्त बस यात्रा का जो प्रावधान परोसा गया, वह लोकलुभावनवाद उनकी राजनीति नेका स्थायी हिस्सा बन गया। नरेंद्र मोदी सरकार ने इंदिरा के के जमाने के सस्ता राशन को रेवड़ी की राजनीति के तौर पर अपना लिया। कोविड के आपदाकाल में शुरू की गई मुफ्त राशन योजना को चुनावों को ध्यान में देखते हुए मोदी सरकार द्वारा अगले 5 साल के लिए बढ़ा दिया गया।
महिलाओं से जुड़ीं योजनाएं
मध्य प्रदेश में सर्वप्रथम महिलाओं को ध्यान में रखकर शुरू की गई लाडली बहन और गृहलक्ष्मी योजना, सदृश योजनाएं अब सभी राज्यों ने अपना ली है और अभी इन तीन चुनावी राज्यों यानी हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में यहां की चुनाव पूर्व की सरकारों ने महिलाओं को मिलने वाले मासिक सहायता राशि में जबरदस्त बढ़ोतरी की। इसका नतीजा ये हुआ कि इन तीनों राज्यों में महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत विगत के चुनावों से काफी ज्यादा बढ़ा जिसने सत्तारूढ दल को वरीयता दी। महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के साथ साथ राजनीतिक सशक्तीकरण की दृष्टि से यह नया रेवड़ी कल्चर भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय शुरू कर चुका है।
सम्बंधित ख़बरें
चंद्रपुर में नवजात की बिक्री का खुलासा, BJP की दो महिला पदाधिकारी गिरफ्तार; मची राजनीतिक हलचल
नासिक कुंभ मेले की तैयारियों पर संकट: MIDC ने STP के लिए जमीन देने से किया मना, हाईकोर्ट समिति को सौंपा ज्ञापन
Alpha Review: एक्शन, इमोशन और दमदार परफॉर्मेंस का पैकेज है ‘अल्फा’, क्रिटिक्स ने दिए इतने स्टार्स
पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग; 2 अधिकारियों की मौके पर मौत
भारत के राजनीतिक दलों ने पहली बार आधी आबादी के मतों का महत्व बड़ी शिद्दत से पहचाना है। एक कल्याणकारी सरकार को सबसे पहले अपने नागरिकों के लिए आंतरिक व बाह्य सुरक्षा, दूसरा मानव विकास यानी शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई तथा तीसरा व्यापक 5 सामाजिक सुरक्षा का इकोसिस्टम प्राथमिकता में दर्ज होना चाहिए। इसी की परिधि में राजनीतिक दलों को अपने वादे व घोषणापत्र निर्धारित करने चाहिए। यदि जनता के सामाजिक आर्थिक कल्याण की व्यापक फलक पर बात करें तो एबल को रोजगार और डिसेबल को पेंशन तथा डिपेंडेट पापुलेशन को शिक्षा चिकित्सा और स्टाइपेंड। यही सूत्र वाक्य होना चाहिए।
राजकोष पर भार पड़ता है
किसी भी प्रतियोगी लोकतंत्र में चुनाव को लेकर एक लेवल प्लेइंग की स्थिति नहीं बन पाती। मिसाल के तौरपर रेवड़ी की राजनीति में जो दल विपक्ष में है, वह मतदाताओं को नहीं लुभा पाएगा; क्योंकि उसके पास राजखजाना नहीं हैं। जबकि सत्ताधारी दल नको सत्ता सत्ता में रहने का एडवांटेज मिल जाता है। दूसरा राजखजाने पर इसका भारी बोझ भी पड़ता है। अब सवाल है कि क्या इसी तर्ज पर भारतीय चुनावी लोकतंत्र में आइडेंटिटी- मनी-मसल-हेट स्पीचेज की पॉलीटिक्स के साथ पोपुलिज्म पॉलीटिक्स की भी रोकथाम हो, उसके लिए हमारे पॉलीटिकल रेगुलेटर यानी चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप एक व्यापक दिशानिर्देश, मापदंड व कुल मिलाकर एक लक्ष्मण रेखा निर्धारित की जानी चाहिए।
अभी राज्य विधानसभा चुनाव के परिणामों के जरिये ये बातें भलीभांति निर्धारित हो गई कि एंटी इन्कंबेंसी को रेवड़ी कल्चर से कुंद बनाया जा सकता है। इस क्रम में अब नजर दिल्ली के आगामी फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव पर जाकर टिक गई है, जहां आप के प्रमुख केजरीवाल ने रेवड़ी पर चुनावी चर्चा का अपना पंडाल अभी से सजाना शुरू कर दिया है।
मनोहर मनोज द्वारा लेख
Formula of throwing sweets and winning the election is in vogue in electoral democracy
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
Topics:
लेटेस्ट न्यूज़
चंद्रपुर में नवजात की बिक्री का खुलासा, BJP की दो महिला पदाधिकारी गिरफ्तार; मची राजनीतिक हलचल
Jul 03, 2026 | 09:34 AMनासिक कुंभ मेले की तैयारियों पर संकट: MIDC ने STP के लिए जमीन देने से किया मना, हाईकोर्ट समिति को सौंपा ज्ञापन
Jul 03, 2026 | 09:32 AMAlpha Review: एक्शन, इमोशन और दमदार परफॉर्मेंस का पैकेज है ‘अल्फा’, क्रिटिक्स ने दिए इतने स्टार्स
Jul 03, 2026 | 09:30 AMपाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग; 2 अधिकारियों की मौके पर मौत
Jul 03, 2026 | 09:30 AMSIP Investment: 5, 10, 15 और 20 साल में 1 करोड़ का फंड कैसे बनाएं? जानें सही इनवेस्टमेंट का तरीका
Jul 03, 2026 | 09:26 AMShare Market: हफ्ते के आखिरी सत्र में उछला शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में बंपर तेजी; IT शेयरों में रफ्तार
Jul 03, 2026 | 09:23 AMSavan 2026 शुरू होने से पहले जान लें हर छोटी-बड़ी बात, कब से शुरू होगा सावन और कैसे पाएं भगवान शिव की कृपा
Jul 03, 2026 | 09:23 AMवीडियो गैलरी

एक और बड़ा मंदिर घोटाला, मां तुलजा भवानी की 4,121 एकड़ जमीन सरकारी कागजों से गायब; VIDEO वायरल
Jul 02, 2026 | 09:48 PM
Exclusive: हां.. मीनाक्षी नटराजन के केस के बारे में हमें सोर्स ने बताया था, हेमंत खंडेलवाल ने खोले कई राज
Jul 02, 2026 | 05:14 PM
पुणे मर्डर केस में नया मोड़! केतन का मजाक उड़ाने वाली फीमेल डॉक्टर 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट
Jul 01, 2026 | 11:00 PM
वाराणसी दालमंडी कॉरिडोर का रास्ता साफ, भारी फोर्स के बीच 5 मस्जिदों पर कार्रवाई शुरू; देखें VIDEO
Jul 01, 2026 | 10:45 PM
Atiq Ahmed: अतीक की जमीन पर बनेगा गरीबों का आशियाना, PDA लाने जा रहा प्लान; देखें VIDEO
Jul 01, 2026 | 10:34 PM
‘मरने के बाद कोई…’, सना खान के ‘कयामत’ वाले VIDEO ने इंटरनेट पर मचाया बवाल; सोशल मीडिया पर खूब हो रहा वायरल
Jul 01, 2026 | 08:43 PM










