नवभारत संपादकीय: विदेशी अनुदान विधेयक 2026 पर संसद में भारी बवाल और समीक्षा के लिए JPC को सौंपा मामला

FCRA Bill 2026: विदेशी अनुदान विधेयक 2026 पर संसद में हंगामा। सरकार ने समीक्षा के लिए इसे JPC को सौंपा। एनजीओ, ट्रस्ट व अल्पसंख्यक संस्थानों के विदेशी फंडिंग नियमों और संपत्ति जब्ती पर उठा विवाद।
Illustration of the Indian Parliament building representing the FCRA Bill 2026 debate
भारतीय संसद डिजाइन फोटो
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Foreign Contribution Regulation Amendment Bill 2026: एनजीओ, ट्रस्ट व धार्मिक संस्थानों को मिलने वाले विदेशी अनुदान से संबंधित संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर बहस शुरू हो गई है। 2010 में बने कानून में विदेशी अंशदान (नियमन) विधेयक 2026 के जरिए संशोधन किया जाना है। बीजेपी नेतृत्व की एनडीए सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा व पारदर्शिता के लिहाज से यह संशोधन महत्वपूर्ण बताया है जबकि विपक्ष का कहना है कि सार्वजनिक कल्याण के साधनों पर यह विधेयक सरकारी मशीनरी को जरूरत से ज्यादा अधिकार देता है।

संसद में भारी विरोध के बाद समीक्षा

संसद में इस मुद्दे पर विपक्ष का भारी विरोध होता देखकर सरकार ने इस विधेयक को गहन समीक्षा व संभावित सुझावों के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का निर्णय लिया है। विपक्ष ने इस विधेयक को पूरी तरह वापस लेने की मांग की थी और कहा था कि यह समाज के खिलाफ है तथा अल्पसंख्यक विरोधी है।

अल्पसंख्यक और गैर-लाभकारी संस्थाओं पर असर

दिल्ली सहित महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, बंगाल तथा पूर्वोत्तर राज्यों में मिशनरी संस्थाएं स्कूल व अस्पताल चला रही हैं। यह विधेयक ईसाई मिशनरी स्कूलों, अस्पतालों, अनाथालयों तथा अन्य अल्पसंख्यक संस्थाओं को निशाना बनाता है। यदि किसी एनजीओ का पंजीयन समाप्त या रद्द हो जाता है तो इस विधेयक से सरकार को विदेशी धन से निर्मित स्कूल, अस्पताल या अन्य संपत्ति जब्त करने का अधिकार मिल जाएगा।

विपक्ष ने विधेयक के उन प्रावधानों का भी विरोध किया है, जिसमें ऐसे संगठनों की संपत्ति जब्त की जा सकती है, जिनका पंजीयन अनेक वर्ष पहले रद्द हो चुका है। लेकिन अभी वह घरेलू अंशदान के आधार पर संचालित किए जा रहे हैं। इस विधेयक में कहा गया है कि विदेशी अंशदान नियमन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से पहले राज्य सरकारों को केंद्र की अनुमति लेनी होगी।

संघीय ढांचे पर सवाल

इसका विरोध करते हुए विपक्ष ने कहा कि यह भारत के संघीय ढांचे के खिलाफ होगा तथा जांच केंद्र के हाथों में चली जाएगी। सारा विदेशी अनुदान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की दिल्ली शाखा के माध्यम से लाने की बाध्यता से कोई मुनाफा न कमाने वाले देश के दूरदराज के संगठनों को भारी परेशानी होगी और व्यर्थ का खर्च उठाना पड़ेगा। इंडिया गठबंधन तथा अन्य विपक्षी पार्टियों ने सामूहिक रूप से इस संशोधन विधेयक का विरोध किया है।

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संगठनों की राह में प्रशासनिक और आर्थिक चुनौतियां

कांग्रेस ने कहा कि उन संगठनों को इसका निशाना बनाया जाएगा, जो बीजेपी की विचारधारा से जुड़े नहीं हैं। इससे देश में इंस्पेक्टर राज शुरू हो जाएगा। समाजवादी पार्टी ने सरकार के पारदर्शिता के दावे को चुनौती दी। टीएमसी ने संसद में इस विधेयक का कड़ा विरोध किया तथा इसे वापस लेने की मांग की। विपक्ष का कड़ा विरोध देखते हुए सरकार ने इस विधेयक को जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव रखा। संयुक्त संसदीय समिति में लोकसभा के 21 तथा राज्यसभा के 10 सदस्यों का समावेश है। समिति से कहा गया है कि वह संसद के शीतकालीन सत्र के प्रथम सप्ताह में लोकसभा के पटल पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

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