RSS पर नकेल कसने की तैयारी में कर्नाटक सरकार? सरकारी जमीनों के इस्तेमाल पर नए बिल को मंजूरी, मचा बवाल

Karnataka Congress-RSS Clash: कर्नाटक सरकार सरकारी संपत्तियों पर कार्यक्रमों के लिए अनुमति अनिवार्य करने वाला नया बिल ला रही है, जिससे आरएसएस के मार्च और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है।
Karnataka Govt Public Property Bill
कर्नाटक में सार्वजनिक संपत्ति विधेयक कैबिनेट से मंजूरी मिली(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Karnataka Govt Public Property Bill: कर्नाटक में कांग्रेस और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच जारी सियासी टकराव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को कर्नाटक कैबिनेट ने सरकारी संपत्तियों और सार्वजनिक जगहों के इस्तेमाल करने को लेकर एक बिल को मंजूरी दे दी। इस बिल के तहत अब सरकारी जमीन या राज्य सरकार की देखरेख वाली जगहों पर किसी भी प्रकार की जनसभा या  कार्यक्रम के आयोजन से पहले सरकार की अनुमति लेना आवश्यक होगा। 

जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार इस बिल को कर्नाटक विधानसभा के मौजूदा मानसून सत्र में पेश कर सकती है। इस बिल का उद्देश्य सरकार के अधीन आने वाली जमीनों, सार्वजनिक जगहों, स्कूल, कॉलेज, खेल के मैदान, पार्क और सड़कों इस्तेमाल को लेकर नियम तय करना है। अगर बिल विधानसभा से पास हो जाता है, तो राज्य में किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले सरकार की अनुमति लेना जरूरी हो जाएगा। 

क्यों लाया गया बिल?  

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, कर्नाटक सरकार द्वारा इस बिल को लाने का असली मकसद 18 अक्टूबर 2025 को गृह विभाग के विवादित स्टैंडिंग ऑर्डर को बदलना है। सरकार ने इसे लेकर कहा है कि यह कानून सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को व्यवस्थित करने के लिए लाया जा रहा है। हालांकि, इस बिल को लेकर सियासत तेज हो गई है और भाजपा ने आरोप लगाया है कि यह बिल संस्थाओं को निशाना बनाने के लिए लाया जा रहा है। 

बता दें कि, 18 अक्टूबर 2025 में कर्नाटक के गृह विभाग ने एक आदेश जारी किया था। इसमें 10 से अधिक लोगों के किसी भी सरकारी संपत्तियों में जुटने से पहले सरकार की अनुमति लेने को अनिवार्य किया गया था। सरकार के इस आदेश को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसके बाद मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी। अब राज्य सरकार पुराने आदेश को वापस लेकर उसकी जगह सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर एक नया और व्यापक कानून बनाने का फैसला किया है। 

नए कानून से क्या होगा?   

अगर इस बिल को विधानसभा से मंजूरी मिल जाती है, तो राज्य सरकार को ऐसे संगठनों को मंजूरी देने या नहीं देने का अधिकार होगा जो सरकारी जमीन पर मार्च, रूट मार्च या दूसरे कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि सरकार के इस फैसले का सीधा असर राज्य में आरएसएस के कार्यक्रमों पर पड़ सकता है, जिनका आयोजन आमतौर पर सार्वजनिक मैदानों और शिक्षण संस्थानों के परिसर में किए जाते हैं। 

भाजपा ने प्रियंक खरगे पर बोला हमला

राज्य सरकार के इस फैसले पर बीजेपी ने आपत्ति जताते हुए कांग्रेस नेता और कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियंक खरगे पर हमला बोला है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस कानून का उपयोग आरएसएस और भगवा पार्टी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए कर रही है। 

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बीजेपी प्रवक्ता जीएस प्रशांत ने कहा कि यह फैसला कांग्रेस सरकार द्वारा अपनी प्रशासनिक नाकामियों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। प्रियंक खरगे सरकार के कुशासन से जनता का ध्यान हटाने के लिए संघ को निशाना बनाना चाहते हैं। प्रशांत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों के अनुसार, लोगों के किसी संगठन का रजिस्टर्ड होना अनिवार्य नहीं है। यह स्पष्ट है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बीजेपी और संघ को निशाना बनाना चाहती है। 

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