नवभारत संपादकीय: मंत्रियों के लाडले फिर मूल विभाग में, देवेंद्र फडणवीस का बड़ा एक्शन

Maharashtra Cabinet Staff: महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मंत्रियों के दफ्तरों में गैर-कानूनी ढंग से तैनात 314 कर्मचारियों को 10 सितंबर तक अपने मूल विभाग में लौटने का कड़ा निर्देश दिया है।
chief minister Devendra Fadnavis
डिजाइन फोटो सोर्स- नवभारत
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Devendra Fadnavis Staff Repatriation Order: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त कदम उठाते हुए मंत्रियों के लाडले 314 अधिकारियों व कर्मचारियों को उनके मूल कार्यालयों में वापस भेजने की पहल की है। लोन बेसिस या उधारी पर लिए गए इन कर्मचारियों के संबंध में लिए गए निर्णय को स्वागतयोग्य माना जा रहा है। कैबिनेट मंत्रियों के कार्यालय में व्यक्तिगत सचिव (पीएस) से चपरासी तक कुल 15 पद निर्धारित किए गए हैं। इसी तरह राज्यमंत्री के कार्यालय के लिए 12 पद स्वीकृत हैं।

उधारी के स्टाफ का खेल और 'विशेष' जिम्मेदारी

इससे ज्यादा कर्मचारी नहीं लिए जा सकते, लेकिन इस नियम के दायरे में काम करना कुछ मंत्रियों को पसंद नहीं आता। वह नियमों को ताक पर रखकर अन्य विभागों के कर्मचारी उधार ले आते है। मत्रियों के कायालय में ऐसे 330 कर्मचारी देखे गए। इसका अर्थ यह हुआ कि प्रत्येक मंत्री के कार्यालय में स्वीकृत की तुलना में 8 कर्मचारी ज्यादा थे। मंत्रालय में चर्चा थी कि यह उधारी पर लिए गए कर्मचारी मंत्री का व्यक्तिगत काम, राजनीतिक काम तथा 'विशेष' काम करते हैं और कुछ अधिकारियों से संपर्क का काम भी करते हैं।

यह भी कहा जाता है कि यह लोग मंत्रियों या बड़े अधिकारियों के रिश्तेदारों या राजनीतिक रूप से निकटवर्ती लोगों का काम करने में कुशलता रखते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री कार्यालय ने पिछले कुछ महीनों में गुप्त रूप से पता लगाया कि यह उधारी पर लिए गए कर्मचारी कौन-सा काम करते हैं, किससे मिलते हैं। कहा जाता है कि कुछ व्यक्तिगत सचिव या सहायक ही मंत्री को गलत या गैरकानूनी काम के लिए प्रवृत्त करते हैं तो कहीं मंत्री उनके जरिए ऐसा काम करवाते हैं। यह दोनों ही बातें अनुचित हैं।

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भ्रष्टाचार की शुरुआत और गुप्त जांच का खुलासा

पीएस व ओएसडी को डेढ़ वर्ष पूर्व पुणे में नियम, प्रक्रिया, गोपनीयता, हितसंबंध में टकराव, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग, राजनीतिक दबाव का कैसे मुकाबला किया जाए जैसी बातों का प्रशिक्षण दिया गया था। वह मंत्री को विनम्रता से बता सकते हैं कि कौन-सा काम नियमबाह्य है। इतने पर भी देखा गया कि मंत्रालय शासन का केंद्र न रहकर व्यक्तिगत प्रभाव का केंद्र बन जाता है और वहां से भ्रष्टाचार की शुरुआत होती है।

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प्रशासनिक व्यवस्था पर असर और 10 सितंबर का अल्टीमेटम

इसे देखते हुए इन सभी कर्मचारियों को 10 सितंबर तक अपने मूल कार्यालय में लौट आने की चेतावनी दी गई है। क्योंकि ऐसी नियुक्तियों से कर्मचारियों को उधार लेने वाले कार्यालय व मूल कार्यालय दोनों के लिए खाली पद भरना कठिन हो जाता है। इससे मूल विभाग के कामकाज पर असर पड़ता है और प्रशासकीय दिक्कतें बढ़ती हैं।

यदि कोई कर्मचारी अपने मूल कार्यालय में वापस नहीं आता तो उसका वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है। आम तौर पर किसी अन्य विभाग के मनपसंद कर्मचारी को अपने कार्यालय में मंत्री यह कहकर लाते हैं कि यह हमारे विश्वास का कुशल आदमी है जिसके बगैर ऑफिस नहीं चलेगा। उस कर्मचारी का वेतन उसके मूल कार्यालय से निकलता है जबकि वह मंत्री के कार्यालय में काम करता है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसी बीमारी का इलाज किया है। देखना होगा कि इस पर कितना अमल होता है।

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