नवभारत संपादकीय: गाड़ी का माइलेज घट रहा है और इंजन में आ रही खराबी? ई-20 पेट्रोल को लेकर SIAM ने जताई चिंता
Ethanol Blended Petrol : E20 पेट्रोल को लेकर वाहनों के इंजन खराब होने और माइलेज घटने की चिंताएं बढ़ी हैं। जानिए SIAM की चेतावनी, इथेनॉल से होने वाले नुकसान और इस पर सरकार की सफाई।
- Written By: अनन्या तिवारी
नवभारत संपादकीय (सोर्स-डिजाइन फोटो)
SIAM Letter On E20 Fuel Concerns: यद्यपि ऑटोमोबाइल कंपनियों के सबसे बड़े संगठन सियाम ने इथेनॉल के संबंध में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय को लिखा अपना पत्र वापस ले लिया, लेकिन फिर भी सियाम ने जिन मुद्दों पर चिंता जताई थी, वह कायम है । ये मुद्दे हैं वाहनों के माइलेज में गिरावट, पुराने वाहनधारकों को परेशानी तथा सरकार के इथेनॉल संबंधी दावे और लोगों की शंका । सियाम ने विभिन्न मामलों की जांच की थी, जिनमें इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की वजह से गाड़ियों के इंजन व एग्जॉस्ट सिस्टम के महत्वपूर्ण पार्ट तेजी से खराब होने की बात कही गई थी ।
इथेनॉल की नमी से खतरा
क्लोराइड प्रदूषित इथेनॉल की नमी की वजह से वाहनों में खराबी आ रही है । नमी से पेट्रोल और इथेनॉल अलग-अलग हो जाते हैं । यदि इथेनॉल प्रदूषित है तो ई-20 के अनुकूल कही जाने वाली 2023 के बाद निर्मित कारों में भी बिगाड़ आ सकता है । सियाम (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाईल मैन्युफैक्चरर्स) के पत्र में बताया गया था कि ई-20 पेट्रोल में ज्यादा क्लोराइड व नमी मिलने की वजह से फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप, एग्जॉस्ट गैस रिसर्कुलेशन वॉल्व तथा इंजन से जुड़े कई पार्ट तेजी से खराब हो रहे हैं । फील्ड टेस्ट में क्लोराइड के कारण जंग लगना तथा बिना वजह क्षरण (घिसावट) के मामले सामने आए हैं । वाहन में इंधन भरवाने के तुरंत बाद भी इंजन बंद होने की समस्या आ जाती है । क्योंकि इथेनॉल की खासियत है कि वह वातावरण से मॉइश्चर या नमी को खींचता है ।
संसद में सरकार का आश्वासन
इस संबंध में सरकार का कहना है कि जरूरत से ज्यादा बढ़ाकर चिंता पेश की जा रही है । 30 जुलाई को सरकार ने संसद में आश्वासन दिया कि ईंधन प्रणाली, इंजन के टिकाऊपन, ड्राइविंग, सामग्री अनुकूलता की सफलतापूर्वक जांच-पड़ताल और वैधता के बाद ई-20 के उपयोग को स्वीकृति दी गई । ई-20 के समर्थन में चाहे कितनी दलील दी जाएं, लेकिन पुराने वाहनों को इससे क्षति हो रही है और उन्हें दुरुस्ती के लिए ले जाना पड़ रहा है । माइलेज के मुद्दे पर दलील दी जाती है कि ई-20 के इस्तेमाल से यह सिर्फ 2-3 प्रतिशत घटता है और बहुत कुछ ड्राइविंग के तरीके पर भी निर्भर है ।
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2000 सैम्पल्स की जांच रिपोर्ट
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल का लंबे समय तक प्रचार किया था, लेकिन अब वह कहते हैं कि ई-20 लागू करने का फैसला उनका अकेले का नहीं पूरी कैबिनेट का था । पेट्रोलियम मंत्री वह नहीं, बल्कि हरदीपसिंह पुरी हैं । क्लोराइड के मुद्दे पर सफाई देते हुए सरकार ने कहा कि पूरे देश से 2,000 सैम्पल लिए गए, लेकिन सिर्फ 2 मामलों में क्लोराइड की मौजूदगी मिली । इसके विपरीत शिकायत यह है कि क्लोराइड से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी हुई है । सियाम ने ई-20 व ई-85 फ्यूल में क्लोराइड की सीमा 1 एमजी से कम रखने की सिफारिश की है ।
सरकार का दावा है कि यदि इथेनॉल का इस्तेमाल नहीं करते, तो पेट्रोल का दाम 125 रुपये प्रति लीटर से ऊपर चला जाता । इन बातों के बावजूद, जो लोग बगैर इथेनॉल मिश्रित शुद्ध पेट्रोल खरीदना चाहते हैं, उनके लिए वैसी सुविधा होनी चाहिए । शंका है कि क्या ई-20 का प्रयोजन पुराने वाहनों को कबाड़ बना देने के लिए है? पारदर्शिता के अभाव में बहस का दायरा बढ़ता ही जा रहा है ।
