नवभारत संपादकीय: Donald Trump के फैसले से हड़कंप, अमेरिका में बड़े सैन्य अफसरों की बर्खास्तगी
US Military Shakeup: Donald Trump के कार्यकाल में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की अचानक बर्खास्तगी से अमेरिका में हलचल, ईरान युद्ध के बीच फैसले पर उठे सवाल।
- Written By: अंकिता पटेल
Donald Trump Iran War Decisions( Source: Social Media )
Donald Trump Iran War Decisions: अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के इशारे पर रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज के अलावा जनरल डेविड होडने व मेजर जनरल विलियम ग्रीन को बर्खास्त कर दिया। उन्हें सेवामुक्त करने की कोई वजह नहीं बताई गई।
ईरान से युद्ध चलते समय अचानक ऐसा कदम क्यों उठाया गया? ये सभी कुशल, वरिष्ठ और सैन्य सेवा के सम्मानित वरिष्ठ अधिकारी थे। इसके पहले ट्रंप ने अपनी अटानी जनरल टॉम बोन्डी को बर्खास्त किया।
इस तरह के बड़े फैसलों से अमेरिका के राजनीतिक व सैनिक क्षेत्रों में खलबली देखी जा रही है। क्या इसके पीछे कोई द्वेष भावना है या ट्रंप की मर्जी पूरी नहीं करने पर यह प्रतिशोध की कार्रवाई है? कहा जाता है कि राष्ट्रपति सिस्टम को दुरुस्त कर रहे हैं।
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लेकिन अनुभवी सेनाध्यक्ष को हटा देना ऐसे लोगों का काम है, जिन्होंने बगैर किसी ठोस या सधी हुई रणनीति के ईरान के खिलाफ जंग छेड़ दी और अब उससे बाहर निकलने की भी उनके पास कोई योजना नहीं है।
क्या इतिहास दोहराया जा रहा है? 1950 जैसी स्थिति की आहट
अमेरिका इजराइल का अंधानुकरण कर ईरान को दूसरा गाजा बनाना चाहता था। जिन फौजी अफसरों को बखर्खास्त किया गया उनका सेवाकाल काफी अच्छा था और उन्होंने अनेक युद्धों में अमेरिकी फौज का नेतृत्व किया था।
हो सकता है कि इन जनरलों ने रक्षामंत्री को बताया होगा कि ईरान के खिलाफ सैनिक कार्रवाई व्यावहारिक नहीं रही और अमेरिकी हितों के लिए नुकसानदेह बनती जा रही है। जैसे ही ट्रंप ने ईरान में थलसैनिक उतारकर जमीनी लड़ाई की धमकी दी, यह सेनाधिकारी बर्खास्त कर दिए गए, यह स्थिति 1950 की याद दिलाती है।
जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस। दुमेन ने जनरल मैक ऑर्थर को सेनाप्रमुख पद से बर्खास्त किया था। इसकी एक वजह यह भी थी कि मैक ऑर्थर की लोकप्रियता से टूमेन को आशंका हो गई थी कि कहीं वह प्रतिद्वंदी के रूप में उन्हें चुनौती न दें। द्वितीय विश्व युध्द में मैक ऑर्थर की साहसिक भूमिका रही थी।
इसके बाद हुए चुनाव में जनरल ड्वाइट डी आहजनहाव राष्ट्रपति चुने गए थे। अटानीं जनरल तथा 3 वरिष्ठ सेनाधिकारियों की बर्खास्तगी दर्शाती है कि डोनाल्ड ट्रंप अपनी विफलता को लेकर काफी बेचैन हैं। ईरान के ड्रोन खाड़ी देशों में अमेरिकी सैनिक अड्डों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अमेरिकी विमान भी मार गिराए गए हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है। जो भी ट्रंप के निर्णयों से असहमति जताता है और उनके दुष्प्रभाव के बारे में आगाह करता है उसे वह रास्ते से हटा देते हैं।
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एपस्टीन फाईल मामले में एटर्नी जनरल के रूप में पाम बोंडी ने ट्रंप को बचाने की यथासंभव कोशिश की। जब न्यायपालिका का बहुत दबाव बढ़ा तो कुछ सामग्री उन्हें जारी करनी पड़ी।
इसे ट्रंप ने विश्वासघात माना व बॉडी को बखास्त कर दिया। ट्रंप का तानाशाही स्वभाव यही दिखाता है कि अब वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रास्ते पर जाने लगे हैं और अपने प्रशासन में सिर्फ ऐसे लोगों को रखना चाहते हैं, जो उनकी हां में हां मिलाएं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
