नवभारत विशेष: ट्रंप पर हमला अमेरिकी दादागिरी पर पलटवार, क्या अब टूट रहा है जनता का सब्र?
Donald Trump Attack: वॉशिंगटन के हिल्टन होटल में राष्ट्रपति ट्रंप के करीब पहुंचे हमलावर ने 8 राउंड फायरिंग की। क्या ट्रंप की आक्रामक नीतियां अब खुद अमेरिका के लिए खतरा बन रही हैं? जानिए पूरा सच।
- Written By: आकाश मसने
डोनाल्ड ट्रंप पर हमले का दृश्य (डिजाइन फाेटो)
Hilton Hotel Shooting: हाल के कुछ महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप दर्जनों बार यह कहते सुने गए कि वह ईरान को मिट्टी में मिला देंगे अथवा यूरोप की हमें कोई जरूरत नहीं है, नाटो के देश कायर हैं, ग्रीनलैंड हमारा जब मन होगा ले लेंगे, कनाडा अमेरिका का 51वां प्रांत है या वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा की बारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल के महीनों में जितनी दादागिरी कर सकते थे सब कर लिया है। लेकिन जिस तरह हिल्टन होटल में एक हमलावर गोलियां बरसाता हुआ उनके 45 मीटर निकट तक पहुंच गया। उससे साबित होता है कि खुद अमेरिका में भी अब लोग उनकी परवाह नहीं करते और उनकी दादागिरी के विरुद्ध प्रतिरोध जताना चाहते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति व्हाइट हाउस कवर करने वाले देसी-विदेशी पत्रकारों के साथ डिनर पार्टी कर रहे थे, तभी मेटल डिटेक्टर प्वांइट तक एक 31 वर्षीय हमलावर कैलिफोर्निया का निवासी कोल थॉमस एलन 8 राउंड गोलियां बरसाते हुए उनके करीब बढ़ रहा था, जिससे साबित हो गया है कि दुनिया की अकेली महाशक्ति का तमगा लेकर घूमने वाले प्रेसीडेंट ट्रंप भी उतने ही असुरक्षित हैं, जितना दुनिया का कोई भी राजनेता।
पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन पर भी हुआ था हमला
हमलावर ने अपने घर मैसेज भेजकर कहा था कि ट्रंप गद्दार है, रेपिस्ट है, मैं उसे और उसके कैबिनेट को नहीं छोडूंगा। 45 साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन पर इसी जगह जानलेवा हमला हुआ था। 30 मार्च 1981 को उन पर 6 गोलियां चलाई गई थीं, पर वह बच गए थे। लेकिन उनके सेक्रेट्री ताउम्र के लिए अपाहिज हो गए थे। ट्रंप ने जिस तरीके से मनमानी कर रखी है, उसके चलते लगता है अब दुनिया के दूसरे देशों की तो बात छोड़एि, खुद उनके अपने नागरिक भी इस सबसे बहुत परेशान हो चुके हैं और उनका फ्रस्टेशन अब खूनी प्रतिरोध के रूप में भी उभरकर सामने आ रहा है।
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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का विरोध
हाल के महीनों में अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विरोध हो रहा है और लोग सारे डर को एक तरफ रखकर, सड़कों पर उतर आए हैं। ट्रंप जैसे विभाजनकारी स्वभाव वाले राजनेता शायद ही हाल के दशकों में कभी अमेरिका में देखे गए हों। एक तरफ वह आव्रजन नीति पर पूरी दुनिया को रह-रहकर अपमानित कर रहे हैं, दूसरी तरफ ‘अमेरिका फर्स्ट’ के अपने घोषित नारे के चलते अमेरिका में रह रहे प्रवासियों का अपमान कर रहे हैं, साथ ही उनकी खिल्ली उड़ा रहे हैं।
25 अप्रैल की रात 31 वर्षीय इंजीनियर एलन ने जिस तरीके से अपनी जान की परवाह न करते हुए, इतना बड़ा कदम उठाया उससे साफ है कि लोग किसी भी कीमत पर अपने विरोध को दर्ज कराना चाहते हैं। वह सिर्फ अमेरिका में प्रेसीडेंट ट्रंप के विरोध की बात नहीं है, इजराइल में भी यही सब हो रहा है। इजराइल में लाखों लोग प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना कर रहे हैं और खुलेआम उनके देश को युद्ध में झोंके रहने की नीति के विरुद्ध सड़कों पर उतर आए हैं। पहले लगातार गाजा के खिलाफ उनका यह युद्ध उन्माद जारी रहा और अब
ईरान के विरुद्ध भी वह इसी नक्श-ए-कदम पर आगे बढ़ रहे हैं। इस बात से इजराइल के लोग लगातार परेशान हैं, वह भी दुनिया के दूसरे देशों की तरह सुकून की जिंदगी जीना चाहते हैं। निश्चित रूप से चाहे अमेरिका के लोग हों या इजराइल के, ये अपने वर्तमान शासकों की नीतियों से न सिर्फ असहमत हैं बल्कि अब परेशान हो चुके हैं। हो सकता है अमेरिका की आक्रामकता के कारण दुनिया के और भी कई देश अमेरिका से डरने लगें। लेकिन जो अमेरिकी लोग खुद इस आक्रामकता का विरोध कर रहे हैं, वो इस बात को जानते हैं कि उनके लोकतांत्रिक भविष्य पर ही एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लग सकता है।
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जब अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी दबंगई से जो मन आए करते रहेंगे, तो इस बात की क्या गारंटी है कि कल को खुद अपने नागरिकों के विरुद्ध इस आक्रामकता को नहीं आजमाएंगे। आम अमेरिकी इस बात को बेहतर ढंग से जानते हैं कि शासकों का बेलगाम होना, अंततः उनके लोकतांत्रिक भविष्य पर ही लगाम लगाएगा। शायद यही कारण है कि दुनिया में भले अमेरिका अपनी धाक जमा रहा हो, लेकिन उसका यह आक्रामक रवैया खुद अपने देश में बूमरैंग कर रहा है।
लेख- डॉ. अनिता राठौर के द्वारा
