नवभारत निशानेबाज: इस रिसर्च का आखिर क्या कहना, गाय के दूध में होता है सोना
Cow Gold Claim: गाय के कूबड़ में सोना बनने और दूध के सुनहरा होने के दावे पर विवाद तेज है। वैज्ञानिक तथ्यों और आस्था आधारित बयानों के बीच सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
नवभारत डिजाइन फोटो
Dilip Ghosh Cow Milk Claim: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष व लोकसभा सदस्य दिलीप घोष ने दावा किया कि देसी गाय के कूबड़ (हम्प) में सूर्य नाड़ी रहती है जिस पर सूर्य की किरणें पड़ने से सोना उत्पन्न होता है। गाय के दूध में यही सोना मिला रहता है। इसी वजह से उसके दूध का रंग सुनहरा या हल्का पीला होता है। हमारा ख्याल है कि ऐसी विस्मयजनक रिसर्च पर दिलीप घोष को विज्ञान का नोबल प्राइज दिया जाना चाहिए।’
हमने कहा, ‘जब मानव शरीर में आयरन, फॉस्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक हो सकता है तो गाय के दूध में सोना क्यों नहीं हो सकता? बीजेपी सांसद की आस्थापूर्ण खोज पर शक मत कीजिए। आपको मालूम होगा कि समूची दुनिया में केवल भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। हमारे सभी राजा स्वर्णमुकुट पहनते थे और सोने के सिंहासन पर बैठते थे। इतिहास में गुप्त काल को स्वर्णयुग कहा गया है। तब सोने के सिक्के चला करते थे जिन्हें अशर्फी कहते थे। राजा-महाराजा किसी पर प्रसन्न होते थे तो उसे स्वर्ण मुद्राओं से भरा थाल दिया करते थे। पुराणों में उल्लेख है कि ऐसी हजारों गाय दान दी जाती थीं जिनके सींग सोने से मढ़े रहते थे।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, देश में सिर्फ कोलार गोल्ड फील्ड में काफी गहराई में सोना पाया जाता है। बड़ी चट्टान को तोड़ने पर थोड़ा-सा स्वर्ण निकलता है। फिर इतना सोना कैसे आया होगा?’
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हमने कहा, ‘पुराने ऋषि-मुनि वैज्ञानिक थे जो अपनी आश्रमरूपी प्रयोगशाला में पारे से सोना बनाया करते थे। पारस पत्थर लोहे को स्पर्श कराओ तो वह भी तुरंत सोना बन जाता है। पुराने कीमियागर या अल्केमिस्ट ऐसे ही सोना बनाया करते थे। द्वारकापुरी में सत्राजित रहता था जिसे सूर्य भगवान ने एक चमत्कारी मणि दी थी। जब सूर्य मध्यान्ह में आता था तो उस मणि से सोने की वर्षा होने लगती थी।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, पुराने किस्से-कहानी मत सुनाइए। हमें लगता है कि गाय पर निबंध में बच्चे लिखेंगे- गाय के 4 पैर 2 सींग और पूंछ होती है। वह अत्यंत उपयोगी प्राणी है। देश-धर्म का नाता है, गाय हमारी माता है। गाय में 33 करोड़ देवताओं का वास होता है। इस निबंध में वह दिलीप घोष की रिसर्च भी जोड़ देंगे कि गाय के दूध में सोना होता है।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
