(डिजाइन फोटो)
Asia’s Largest Slum Dharavi: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, हमने अपनी पुरानी विरासत को बड़े जतन से संभालकर रखा है। एशिया की सबसे बड़ी स्लम या मलिन बस्ती धारावी हमारे यहां है। मुंबई की बड़ी-बड़ी भव्य अट्टालिकाओं को यह विशाल झोपड़ा बस्ती मुंह चिढ़ाती है। अमीरी के सामने गरीबी सीना तानकर खड़ी है। आप यहां धारा तेल का इस्तेमाल करते हैं या नल से आने वाले पानी की पतली धार देखते हैं। कभी समय निकालकर धारावी देख आइए, धारावी उस धारदार चाकू के समान है जो दौलतमंद मुंबई के सीने में घुसा हुआ है। आप देखेंगे तो पता चलेगा कि गरीबी गंदगी व असुविधाओं के बावजूद कितने धैर्य या धीरज के साथ लाखों लोग धारावी में रहते हैं।’
हमने कहा, ‘आज आप झोपड़ाबस्ती की चर्चा कर अपना खोपड़ा क्यों खराब कर रहे हैं। आगरा के ताजमहल, उदयपुर के महलों, राजस्थान की हवेलियों, दिलवालों की दिल्ली की बात कीजिए जहां भारत की भव्यता झलकती है। अमेरिका के न्यूयॉर्क के समान ग्लैमरस हमारी मुंबई है जो देश की आर्थिक राजधानी है और जहां शेयर मार्केट और शाहरुख, सलमान और बच्चन वाला बॉलीवुड है।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, जो विदेशी पर्यटक होटल ताज, गेटवे ऑफ इंडिया और मरीन ड्राइव देखते थे वह अब बड़ी तादाद में धारावी की गरीबी देखने पहुंच रहे हैं। वहां की बदहाली 2 घंटे देखने के लिए वह 15,000 रुपये का पेमेंट करते हैं। उनके साथ एक गाइड रहता है जो इस बस्ती की संकरी गलियों में विदेशी टूरिस्ट को घुमाता है जहां आम मुंबईकर भी जाने से हिचकते हैं। वहां की गरीबी व गंदगी एक बिकाऊ वस्तु या सेलेबल कमोडिटी बन गई है, धारावी में गरीबी से उपजे संघर्ष के बीच अपराध पनपता है। वरदराजन मुदलियार जैसा क्राइम बॉस भी वहां की गलियों में पनपा था। धारावी को लेकर कुछ मूवीज भी बनी हैं।’
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हमने कहा, ‘इतनी सरकारें आईं लेकिन कोई धारावी का भाग्य नहीं बदल सकीं। वहां फ्लैट स्कीम बनाने, महानगरीय सुविधाएं प्रदान करने का काम नहीं हुआ। इस झोपड़ाबस्ती का चेहरा-मोहरा कौन बदलेगा?’
पड़ोसी ने कहा, ‘झोपड़े में रहने वाला भी उम्मीद रखते हुए भजन गा सकता है- मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे!’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा