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AI पर नियंत्रण जरूरी, डीप फेक के साथ भी सख्ती आवश्यक

  • Written By: चंद्रमोहन द्विवेदी
Updated On: May 29, 2024 | 03:35 PM
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तकनीक जब उन्नत हो जाती है तो अपने साथ कुछ बुराइयांभी लाती है. इसे देखते हुए। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा है कि देश में आर्टिफीशयल इंटेलिजेंस (एआई) पर प्रभावी अंकुश के लिए बाजार को नियंत्रित करनेवाली सेबी जैसी नियामक संस्था

बनानी होगी, एआई तेजी से बढ़ता क्षेत्र है. इसके लिये नियमों में भी गतिशीलता रखनी होगी. कानून बनाने के साथ सोशल मीडिया कंपनियां और फेक यूजर्स इसमें बचाव का रास्ता निकालने की कोशिश कर सकते हैं. 

इसलिए सभी पहलुओं पर नजर रखनी होगी. एक अच्छी बात यह है कि डीप फेक और झूठी खबरों से लोगों को गुमराह करनेवाले सोशल मीडिया प्लेटफार्म अब सरकार के निशाने पर आ गए हैं. केन्द्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे सख्त कानूनों के लिए तैयार रहें. सोशल मीडिया पर प्रसारित होनेवाले डीप फेक वीडियो पकड़े जाने पर यदि उसे 36 घंटे के भीतर नहीं हटाया गया तो आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली सुविधा खत्म कर दी जाएगी. यह विचार भी किया जा रहा है कि फेक और डीप फेक वीडियो तैयार करने वाले सहायक एप्स की उपलब्धता पर रोक लगे.

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फेक वीडियो, काट छांट कर बनाए गए सिंथेटिक वीडियो तथा फेक न्यूज की पूरी जिम्मेदारी फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म की होगी. सरकार की तैयारी अगले 15 दिनों में इस संबंध में कानून बनाने की है. इसके लिए दिसंबर के प्रथम सप्ताह में बैठक होगी. जिसमें सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर कर नियम बनाए जाएंगे. कुछ पुराने नियमों में बदलाव नए नियम जोड़े जाएंगे. ऐसे कुछ नियम डिजिटल इंडिया एक्ट ने में शामिल किए जा सकते हैं आईटी मंत्री अश्विनी `वैष्णव कहा कि डीप फेक वीडियो लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है. अगले वर्ष आम चुनाव होनेवाले हैं. फेक या सिंथेटिक वीडियो जनमानस को गलत तरीके में प्रभावित कर सकते हैं. 

नए कानून में कंटेंट वेरिफिकेशन टूल्स से पता लगाया जाएगा कि कोई वीडियो फर्जी तरीके से तो नहीं बनाया गया है. डीप फेक वीडियो पकड़े जाने पर यदि उसे 36 घंटे के भीतर नहीं हटाया गया तो आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली सुविधा खत्म कर दी जाएगी. यह विचार भी किया जा रहा है कि फेक और डीप फेक वीडियो तैयार करने वाले सहायक एप्स की उपलब्धता पर रोक लगे. इस तरह के एप्स गूगल या एप्पल प्ले स्टोर में उपलब्ध न हों. फेक कंटेंट की रोकथाम सोशल मीडिया कंपनियों को अपने ही स्तर पर करनी होगी. सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स को फेक कंटेंट के बारे में जागरूक करना होगा, ताकि वे खुद जानकारी रख सकें कि जो फोटो या वीडियो अथवा सूचना बह देख रहे हैं वह सही है या फेक है!

Control on ai is necessary strictness is necessary even with deep fakes

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Published On: Nov 25, 2023 | 12:18 PM

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