अर्थव्यवस्था में सुधार का दावा, अब भी 11 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे
नीति आयोग द्वारा प्रस्तुत सतत विकास लक्ष्य रिपोर्ट-2024 ने भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी ही गुलाबी तस्वीर पेश की है। सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के कुल 16 निर्धारित क्षेत्रों में से असमानता पैरामीटर को छोड़कर 15 क्षेत्रों में भारत की अर्थव्यवस्था ने पर्याप्त बढ़ोतरी हासिल की है।
- Written By: किर्तेश ढोबले
(डिजाइन फोटो)
पिछले 10 वर्षों में देश के करीब 25 करोड़ नागरिक गरीबी रेखा से ऊपर उठे हैं लेकिन अभी भी बीपीएल आबादी देश की कुल जनसंख्या का 11 प्रतिशत है। हालांकि, उज्ज्वला, शौचालय निर्माण, नल जल कनेक्शन, जन सुरक्षा जैसी योजनाओं को लेकर कई मतभिन्नताएं रही हैं, जिसमें हमारे प्रशासनिक तंत्र की भ्रष्टाचार की कहानी जुड़ी होती है। बहुत से उज्ज्वला लाभार्थियों ने सिर्फ इसलिए गैस चूल्हा जलाना छोड़ दिया, क्योंकि एलपीजी सिलेंडर बहुत महंगा था। इसी तरह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान शौचालय निर्माण को एक मिशन के रूप में लिया गया था, लेकिन उसके बाद यह योजना शिथिल रूप में आ गई। अब यह देखा जा रहा है कि देश के कई गांवों में महिलाएं सूर्यास्त के बाद पास के खेतों में फिर से जाने लगी है।
अटल पेंशन योजना जैसी जन सुरक्षा योजना कुछ हद तक ग्रामीण और कमजोर वृद्ध लोगों की सामाजिक सुरक्षा की जरूरत को पूरा करती है, लेकिन वास्तव में देश को एक राष्ट्रव्यापी पेंशन योजना की आवश्यकता है, जिसमें 60 वर्ष से ऊपर की लगभग 15 करोड़ की आबादी को कम से कम रु। 1000 प्रतिमाह प्रदान किया जाए। पीएम आरोग्य योजना निश्चित रूप से गरीब लोगों को टाइप-3 बीमारी के लिए कवर करने वाली एक बीमा योजना है, लेकिन हमारी मौजूदा स्वास्थ्य नीति और प्रणाली देश की करीब 100 करोड़ आबादी की दैनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति में अक्षम है जो पूरी तरह से सरकार पर निर्भर है।
बहुत कम लोगों को निजी अस्पताल नेटवर्क से रियायती सीजीएचएस दरों पर दैनिक उपचार की आवश्यकताएं पूरी हो पाती है। मुफ्त खाद्यान्न को भी एक अच्छी कल्याणकारी नीति नहीं कहा जा रहा है, जिससे सरकार पर 3 लाख करोड़ की सब्सिडी का भारी बोझ आ रहा है। दूसरा, इससे कृषि को बाजार का लाभ मिलने से वंचित होना पड़ता है। यह योजना 80 करोड़ आबादी को अकर्मण्य और परजीवी बना रही है। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था को अभी और कई संतुलित नीतियों की दरकार है।
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अर्थव्यवस्था में सुधार का दावा
नीति आयोग द्वारा प्रस्तुत सतत विकास लक्ष्य रिपोर्ट-2024 ने भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी ही गुलाबी तस्वीर पेश की है। सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के कुल 16 निर्धारित क्षेत्रों में से असमानता पैरामीटर को छोड़कर 15 क्षेत्रों में भारत की अर्थव्यवस्था ने पर्याप्त बढ़ोतरी हासिल की है। देश के अधिकतर राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों का प्रदर्शन न केवल शानदार है, बल्कि उनमें आपस में कड़ी प्रतिस्पर्धा भी परिलक्षित हुई है। इसके परिणामस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था का कुल प्राप्तांक इस बार 71 है, जो वर्ष 2020-21 में प्रस्तुत पिछली एसडीजी रिपोर्ट में 66 था। सतत विकास लक्ष्य रिपोर्ट वर्ष 2018 में शुरू की गई थी, तब भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का कुल अंक योग 57 था। इसके बाद 2019-20 में यह अंक बढ़कर 60 तथा 2020-21 में 66 अंक हो गया था।
प्रमुख उपलब्धियां
एसडीजी 2024 रिपोर्ट की जो प्रमुख उपलब्धियां बताई गई हैं, उसमें पहला पीएम आवास योजना के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र में बने 4 करोड़ से अधिक घर, ग्रामीण भारत में 11 करोड़ शौचालय और लगभग 2।23 लाख सामुदायिक शौचालयों का निर्माण, उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ एलपीजी कनेक्शन, 15 करोड़ से अधिक घरों में नल जल कनेक्शन, 30 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को पीएम आयुष्मान योजना के तहत लाया जाना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 80 करोड़ लोगों का कवरेज, आरोग्य मंदिर नाम से 1.5 लाख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, पीएम जनधन के तहत खुले 52 करोड़ बैंक खाते के जरिये 34 लाख करोड़ की राशि का डीबीटी ट्रांसफर, पीएम कौशल भारत मिशन से 2 करोड़ युवाओं का कौशल विकास, स्वरोजगार और स्ट्रीट वेंडर गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लाई गई पीएम मुद्रा ऋण योजना से 43 करोड़ लोगों के बीच 22.5 लाख करोड़ रुपये का ऋण वितरण शामिल है। लेख मनोहर मनोज द्वारा
