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नवभारत संपादकीय: AI के क्षेत्र में बाजी मारी, चीन के डीपसीक से अमेरिका को चुनौती
अमेरिका के चैट बोट की तुलना में चीन ने अत्यंत कम लागत में डीपसीक बना लिया। सारी दुनिया का ध्यान व आकर्षण डीपसीक की ओर इतनी तेजी से बढ़ा कि उसके सर्वर को दबाव सहना कठिन हो गया।
- Written By: दीपिका पाल

चीन के डीपसीक से अमेरिका को चुनौती (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: सुपर पावर अमेरिका को एआई या कृत्रिम मेधा के क्षेत्र में चीन ने करारा झटका क्षेत्र में चीन ने करारा झटका दिया है. अमेरिका में ‘चैट जीपीटी’ तथा अन्य चैटबोट को चीन के डीपसीक से जबरदस्त चुनौती मिली है. अमेरिका से आयात किए गए चिप्स की सहायता से चीन ने यह करिश्मा कर दिखाया. अमेरिका के चैट बोट की तुलना में चीन ने अत्यंत कम लागत में डीपसीक बना लिया। सारी दुनिया का ध्यान व आकर्षण डीपसीक की ओर इतनी तेजी से बढ़ा कि उसके सर्वर को दबाव सहना कठिन हो गया. चीन ने तय कर लिया है कि वह किसी भी क्षेत्र में अमेरिका को वर्चस्व स्थापित करने नहीं देगा। डीपसीक का विकास कर चीन ने दिखा दिया कि वह एआई के क्षेत्र में कितना आगे बढ़ गया है। यद्यपि अमेरिका ने लाखों डालर खर्च करते हुए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कोई भी उसकी बराबरी न करने पाएं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एआई चिप के निर्यात पर कठोर प्रतिबंध लगाए थे ताकि कोई भी देश प्रतिस्पर्धा में उतरने न पाए. इतने पर भी सत्ता हस्तांतरण के पूर्व बाइडेन ने एक्जीक्यूटिव आर्डर जारी कर एआई क्षेत्र की वृद्धि और विकास के लिए अनेक रियायतें दी थीं। व्हाइट हाउस बार-बार सवाल कर रहा था कि क्या एआई में चीन का अमेरिका से आगे बढ़ जाना दुनिया के हित में होगा ? डीपसीक का विकास करके चीन ने एआई क्षेत्र में अमेरिका का एकाधिकार तोड़ दिया है, डीपसीक कृत्रिम मेधा का अधिक ताकतवर और सस्ता विकल्प है। इसके आने से शेयर बाजार से लेकर खुद को विज्ञान में श्रेष्ठ मानने वाले अमेरिका के विश्वविद्यालयों को आघात लगा है। चीन 2030 तक एआई में विश्व की महाशक्ति बनने का लक्ष्य रखता है. अभी यह प्रतिस्पर्धा जारी है।
इसका अगला लक्ष्य आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) है जिसमें मशीन इंसान के समान सीखने और तर्क करने लगेंगी. अभी कोई इस स्तर तक नहीं पहुंच पाया है. डीपसीक को इसलिए प्रभावी माना जा रहा है क्योंकि वह केवल 6 मिलियन डॉलर के मामूली बजट में निर्मित होने का दावा किया जा रहा है. अनुसंधान और एल्मोरिद्म में चीन कई वर्षों से अमेरिका को बराबरी से टक्कर देता आ रहा है. चीनी एप्स सारे विश्व का डेटा चुराते या हासिल कर लेते हैं लेकिन चीन का सरकारी डेटा गुप्त रखा जाता हैं. चीन के मौसम से लेकर टैक्स रिटर्न तक की कोई जानकारी नहीं मिलती. भारत ने बहुत से चीनी एप्स पर कई वर्षों से प्रतिबंध लगा रखा है. अमेरिकी नौसेना ने भी सुरक्षा कारणों से अपने सदस्यों को डीपसीक का इस्तेमाल करने से मना किया है।
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चीन 2030 तक एआई में विश्व की महाशक्ति बनने का लक्ष्य रखता है,अभी यह प्रतिस्पर्धा जारी है. इसका अगला लक्ष्य आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) है जिसमें मशीन इंसान के समान सीखने और तर्क करने लगेंगी. अभी कोई इस स्तर तक नहीं पहुंच पाया है. डीपसीक को इसलिए प्रभावी माना जा रहा है क्योंकि वह केवल 6 मिलियन डॉलर के मामूली बजट में निर्मित होने का दावा किया जा रहा है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
China deepseek challenges america
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