नवभारत संपादकीय: WhatsApp के नए फीचर पर सरकार सख्त, साइबर सुरक्षा बनी चिंता
WhatsApp Username Feature: मोबाइल नंबर छिपाने वाले WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर केंद्र सरकार ने नोटिस जारी किया है। सरकार को साइबर ठगी, डिजिटल पहचान और उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर चिंता है।
- Written By: अंकिता पटेल
व्हाट्सएप, साइबर ठगी (साेर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
WhatsApp Username Security Risks: वाट्सएप फीचर पर औपचारिक नोटिस जारी करने का केंद्र सरकार का निर्णय न तो डिजिटल संरक्षणवाद के लिए है और न नवोन्मेष की राह में बाधा डालने के लिए, यह इस बात को दर्शाता है कि अब नियमन की तुलना में तकनीक तेजी से विकसित हो रही है। वाट्सएप का प्रस्तावित फीचर यूजर्स को अपना मोबाइल नंबर शेयर किए बिना संवाद करने की अनुमति देता है।
इससे उसकी निजता बनी रहती है और अनावश्यक संपर्क पर रोक लगाता है। इसके विपरीत दूसरी बात यह है कि वाट्सएप के करोड़ों यूजर्स हैं और उसमें मामूली सा परिवर्तन भी कानून व्यवस्था, उपभोक्ता संरक्षण व साइबर सिक्योरिटी के लिए भारी दिक्कतें पैदा कर सकता है।
यूजरनेम आधारित सिस्टम से डिजिटल पहचान या आइडेंटिटी ही बदल जाती है। इससे धोखाधड़ी व वित्तीय फ्राड बढ़ सकते हैं। ठग खुद को सरकारी विभाग या बैंक का अधिकारी बताकर धोखाधड़ी कर सकते हैं।
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डिजिटल नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी
ऐसे कपटपूर्ण अकाउंट का पता जांच एजेंसियां कैसे लगा पाएंगी? वर्तमान समय में वाणिज्य-व्यापार, सुशासन तथा सामाजिक संवाद के लिए डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल हो रहा है इसलिए सरकार चाहती है कि बड़े ढांचागत बदलाव लागू करने से पहले नियामकों या रेगुलेटर्स से अनुमति ली जाए। दूसरा पक्ष यह भी है कि नियामक अनावश्यक नियंत्रण न लादें।
यदि हर तकनीकी अपग्रेड को नौकरशाही अटकाएगी तो तरक्की कैसे हो पाएगी? भारत वैश्विक डिजिटल इकोनॉमी बनने की महत्वाकांक्षा रखता है इसलिए नियमन या नियंत्रण करते समय स्पष्ट नियमों व दूरदृष्टि के साथ सहयोग की भावना भी रहनी चाहिए, सरकार जनहित की सुरक्षा करे जो कि सर्वोपरि है। प्रौद्योगिकी से जुड़ी कंपनियों को नवोन्मेष की स्वतंत्रता मिलती रहे। दोनों में टकराव टालने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही तथा आपसी संवाद होना चाहिए।
यूजरनेम फीचर पर सवाल: प्राइवेसी बढ़ेगी या साइबर ठगी का खतरा?
मेटा की यह दलील कमजोर है कि यूजरनेम फीचर से वाट्सएप ग्राहक की प्राइवेसी बढ़ेगी। पहले ही वाट्सएप यूजर्स उपलब्ध प्राइवेसी से संतुष्ट हैं। उन्हें अतिरिक्त गोपनीयता क्यों दी जाए? इसका गलत फायदा चीटिंग और धोखाधड़ी करनेवाले उठा सकते हैं जिनका पता लगाना मुश्किल हो जाएगा। धोखेबाज किसी अन्य व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान बता कर ठगी कर सकते हैं।
फेसबुक व इंस्टाग्राम में भी इंस्टेंट मेसेजिंग (आई एम) सेवाएं उपलब्ध हैं लेकिन इन एप्स की तुलना में वाट्सएप अधिक लोकप्रिय है। संदिग्ध पहचान से फेसबुक व इंस्टाग्राम में अकाउंट क्रिएट करना आसान है।
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मेसेजिंग प्लेटफार्म को उनकी पारदर्शिता की वजह से कानूनी छूट मिली हुई है। वाट्सएप अपने यूजरनेम फीचर की वजह से विपरीत दिशा में जा रहा है। इस विवाद के बीच वाट्सएप ने सफाई दी है कि यूजरनेम फीचर ऑप्शनल व सुरक्षित है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
