नागपुर में डिजिटल डकैती: न ओटीपी मांगा, न लिंक भेजा...बस 'डायरेक्टर साहब' का नाम लेकर खाली कर दी तिजोरी!

Nagpur Online Scam: नागपुर में डायरेक्टर का वाट्सएप अकाउंट हैक कर साइबर ठगों ने फर्जी निर्देश भेजे। कंपनी ने 98.50 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए, मामला पुलिस तक पहुंचा।
Digital heist in Nagpur: No OTP asked, no link sent... they simply invoked 'Director Sahab's' name and emptied the vault!
साइबर ठगी, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur WhatsApp Hack: नागपुर वाट्सएप अकाउंट हैक कर निदेशक के नाम से फर्जी संदेश भेजकर निजी कंपनी को 98.50 लाख रुपये का चूना लगाया गया। साइबर पुलिस ने कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट की शिकायत पर अज्ञात मोबाइल धारक और बैंक खाताधारक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। मानेवाड़ा निवासी अभिजीत मोरे (32) की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया।

अभिजीत बूटीबोरी स्थित सालासार अलॉय इंडस्ट्री प्रा.लि. कंपनी में चार्टर्ड अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। इस कंपनी के मालिक और डायरेक्टर सेंट्रल एवेन्यू निवासी राधेश्याम मालू हैं। मालू अपने परिवार के साथ जापान दौरे पर गए हुए थे।

डायरेक्टर बनकर व्हाट्सएप पर दिए निर्देश, कंपनी से 98.50 लाख रुपये ठगे

इसी दौरान 20 जून को उनके वाट्सएप नंबर से मोरे के पास एक संदेश आया जिसमें पूछा गया कि क्या इस माह किसी को भुगतान किया जाना है। मोरे ने यह मानकर कि संदेश स्वयं निदेशक मालू ने भेजा है, जवाब दिया कि यूनिटी बैंक को 90 लाख रुपये का भुगतान किया जाना है। इसके बाद 23 जून को उसी नंबर से कंपनी के बैंक खाते में उपलब्ध शेष राशि की जानकारी मांगी गई, मोरे ने खाते का विवरण भेज दिया। इसके बाद फर्जी संदेश भेजने वाले ने खाते में उपलब्ध 98.50 लाख रुपये मुंबई स्थित चिंतामनी प्रोजेक्ट लिमिटेड के एचडीएफसी बैंक के खाते में तत्काल ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। रकम बड़ी होने के कारण मोरे ने मालू से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन वाट्सएप पर उन्हें जवाब मिला कि वे एक महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त हैं।

प्रोफाइल देखकर नहीं हुआ था किसी तरह का संदेह

मोरे ने यह भी बताया कि दूसरे निदेशक की अनुमति के बिना इतनी बड़ी राशि ट्रांसफर करना संभव नहीं है और वो भी शहर में नहीं है। इस पर साइबर ठग ने मैसेज किया कि भुगतान बहुत जरूरी है। चेक के माध्यम से तत्काल राशि ट्रांसफर करने के निर्देश दिए, निदेशक के नंबर से लगातार संदेश आने और प्रोफाइल देखकर अभिजीत को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।

उन्होंने निर्देशानुसार कंपनी के कर्मचारी को तत्काल बैंक भेजकर पहले से हस्ताक्षरित चेक के जरिए चिंतामणि प्रोजेक्ट लिमिटेड नामक कंपनी के बैंक खाते में 98.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। मालू लगातार अभिजीत से वाट्सएप पर संपर्क करने का प्रयास कर रहे थे लेकिन न कॉल लगा और न मैसेज गए।

कुछ समय बाद उन्हें बैंक द्वारा कंपनी के खाते से मोटी रकम ट्रांसफर किए जाने का मैसेज मिला। मालू ने अभिजीत को सामान्य कॉल करके रकम के भुगतान के बारे में पूछा। अभिजीत ने उन्हीं के आदेश पर रकम ट्रांसफर करने की जानकारी दी। तब पूरे मामले का खुलासा हुआ, जब तक बैंक से संपर्क किया गया, पेमेंट रिलीज हो चुका था। अभिजीत ने तुरंत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई। प्राथमिक जांच के बाद साइबर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

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