नवभारत संपादकीय: टीएमसी और बीजेपी के बीच बढ़ता टकराव, बंगाल में चल रही प्रतिशोध की राजनीति
West Bengal Violence: बंगाल में राजनीतिक तनाव और हिंसा के आरोपों को लेकर टीएमसी और बीजेपी के बीच टकराव बढ़ने की बात सामने आई है, जिससे प्रतिशोध की राजनीति पर बहस तेज हो गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
पश्चिम बंगाल राजनीति, (सोर्स: सोशल मीडिया)
TMC BJP Political Clash: चाहे कुछ भी दावा किया जाए, राजनीतिक दलों की तासीर एक जैसी रहती है। सत्ता मिलते ही उनमें उत्साह छा जाता है। बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हर सभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यदि बीजेपी सत्ता में आई तो उनकी सरकार का रवैया टीएमसी या लेफ्ट पार्टियों से बिल्कुल अलग रहेगा और कानून का राज स्थापित किया जाएगा। उन्होंने एक रचनात्मक परिवर्तन लाने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नजर आता है कि शुभेंदु अधिकारी की सरकार भी पुराने डरें पर चल रही है।
टीएमसी के सांसदों अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी की पुलिस के सामने पिटाई की गई। यह प्रतिशोध की राजनीति नजर आती है। अभिषेक बनर्जी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे व टीएमसी के दूसरे नंबर के नेता हैं। टीएमसी की सत्ता रहते अभिषेक बनर्जी के इशारे पर बीजेपी के अनेक नेताओं-कार्यकर्ताओं पर हमले हुए थे।
बीजेपी सरकार आते ही अभिषेक की जेड सिक्योरिटी हटा ली गई। उन्हें भीड़ ने जमकर पीटा और कपड़े फाड़ दिए। शरीर पर अंडे फेंके गए। सुरक्षा कर्मियों ने जैसे-तैसे उन्हें भीड़ के चंगुल से छुड़ाया। इसके दूसरे दिन जब टीएमसी के लोकसभा व्हिप कल्याण बनर्जी इस घटना की रिपोर्ट कराने जा रहे थे तभी उन पर पुलिस के सामने हमला किया गया। उनके सिर पर चोट आई और वह सड़क पर गिर पड़े।
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जनप्रतिनिधियों पर हमले से कानून-व्यवस्था पर सवाल
एक सांसद को कपड़े फाड़कर पीटा जाता है और दूसरे सांसद को पुलिस के सामने मारा-ठोका जाता है। यह कोई कानून-व्यवस्था की निशानी नहीं है। कहां गया प्रधानमंत्री का कानून का राज लाने का वादा? बीजेपी का कहना है कि अभिषेक बनर्जी की पिटाई जनता के गुस्से का नतीजा है और इसके पीछे टीएमसी का अंदरूनी विवाद है। वस्तुतः कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकार की है। यह कैसी बात है कि जनप्रतिनिधि की सड़क पर बुरी तरह पिटाई हो और पुलिस मूकदर्शक बनी देखती रहे। यह राज्य की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की विफलता है। शांति व सुव्यवस्था कायम रखना सरकार का कर्तव्य है।
बंगाल में प्रतिशोध की राजनीति पर बढ़ी चिंता
ममता बनर्जी का आरोप है कि उनके दोनों सांसदो पर हमले के पीछे बीजेपी का हाथ है। उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहते डायमंड हार्बर में बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था। तब बीजेपी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की थी। उस समय बंगाल के पुलिस महासंचालक को दिल्ली बुलाकर फटकार सुनाई गई थी। गत 2 सप्ताह में टीएमसी के अनेक कार्यकर्ताओं की पिटाई व गिरफ्तारी के खबरें आई हैं। बीजेपी को समझना होगा कि ऐसा ही चलता रहा तो ममता बनर्जी फिर सड़क पर उतरकर संघर्ष करेंगी जैसा कि उनका स्वभाव रहा है। बीजेपी सरकार को तय करना है कि बंगाल में हिंसाचार को बढ़ावा दिया जाए या कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान दिया जाए। प्रतिशोध की राजनीति से किसी का भला नहीं होगा।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
