नवभारत विशेष 'बैटल ऑफ गलवान' के टीजर पर बौखलाया चीन

Galwan Valley Clash: ‘बैटल ऑफ गलवान’ के टीजर को लेकर चीन की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। जानें क्यों इस फिल्म के टीजर पर चीन बौखलाया और क्या है पूरा विवाद।
'बैटल ऑफ गलवान' के टीजर पर बौखलाया चीन
बैटल ऑफ गलवान' (सौ.सोशल मीडिया)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून 2020 को भारत के सैनिकों व चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच हिंसक मुठभेड़ हुई थी। इसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे व पीएलए के भी दर्जनों जवान मारे गए थे, जिनकी सही संख्या चीन ने आज तक उजागर नहीं की है, लेकिन अपुष्ट खबरों में यह संख्या 45 बताई गई है। वैसे चीन ने फरवरी 2021 में आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया था कि गलवान में उसके 5 सैनिक मारे गए थे। चीन ने बार-बार दावा किया है कि गलवान घाटी उसकी है। चीन का यह दावा पूर्णतः निराधार व गलत है।

15 जून 2020 की रात घटना से पहले चीन ने कभी भी गलवान घाटी को अपना नहीं बताया था। गलवान घाटी सिर्फ और सिर्फ भारत की है। गुलाम रसूल गलवान का जन्म 1878 में लेह में हुआ था। पहाड़ी बच्चा आंख खोलते ही घाटियों व पहाड़‌यों के उन महीन रास्तों को भी जान लेता है, जो आम आदमी को दिखाई भी नहीं देते हैं। गुलाम रसूल गलवान मात्र 12 वर्ष की आयु में ही तिब्बत, केंद्रीय एशिया के पहाड़ों, विशेषकर काराकोरम रेंज में ब्रिटिश के लिए पोर्टर व गाइड का काम करने लगे। यह वह समय था, जब ब्रिटिश रूस की विस्तार नीति को लेकर चिंतित थे। इन कठिन रास्तों पर गुलाम रसूल गलवान ही ब्रिटिश सैनिकों को गाइड करते थे।

लॉर्ड डनमोर के साथ ऐसे ही एक अभियान के दौरान कारवां रास्ते से भटक गया। कहीं से निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। तब बालक गुलाम रसूल गलवान ने सुझाव दिया कि अगर कोई नदी तलाश ली जाए तो उसके बहाव को देखते हुए वापसी का रास्ता निकल सकता है। लॉर्ड डनमोर ने नदी तलाशने की जिम्मेदारी गुलाम रसूल गलवान को सौंप दी। गुलाम रसूल गलवान ने न सिर्फ नदी को तलाश किया बल्कि वह रास्ता भी खोज निकाला जिसका प्रयोग करके सुरक्षित वापस पहुंचा जा सकता था। फलस्वरूप कारवां मौत से बच गया और इस बात का एहसान मानते हुए लॉर्ड डनमोर ने उस घाटी व नदी का नाम गलवान रख दिया।

जहां तक 'बैटल ऑफ गलवान' फिल्म की बात है तो इसका निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है और सलमान खान इसमें बिक्कुमल्ला संतोष बाबू की भूमिका में हैं, जो भारतीय भूमि की रक्षा करते हुए 2020 की 'लड़ाई' में 16 बिहार रेजिमेंट के अन्य 19 सैनिकों के साथ शहीद हो गए थे। बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया, जो कि भारत का दूसरा सबसे बड़ा युद्ध बहादुरी पुरस्कार है। इस फिल्म का टीजर सलमान खान के 60वें जन्मदिवस 27 दिसंबर को रिलीज किया गया। टीजर में दिखाया गया है कि सैन्य अधिकारी के रूप में सलमान खान व भारतीय सैनिकों का एक समूह चीन के पीएलए सैनिकों की तरफ दौड़ते हुए चार्ज कर रहे हैं और पृष्ठभूमि में 'मेरा भारत देश महान है' गाना चल रहा है।

टीजर की शुरुआत सलमान के किरदार के वॉइसओवर से होती है यह कहते हुए, 'सैनिकों! याद रखो, अगर तुम्हें कोई चोट लगती है, तो उसे पदक समझो और अगर तुम शहीद हो जाओ तो उसे सलाम करो' टीजर को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 60 मिलियन से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। 1.12 मिनट के टीजर में चीन ने इतनी सारी 'कमियां' निकाल लीं और बौखलाहट की सारी हदें पार कर दीं, जिससे स्पष्ट हो जाता है कि चीन गलवान में अपनी शिकस्त पर पर्दा डालना चाहता है वर्ना एक फिल्म, जो अभी सिनेमाघर में आई भी नहीं है, पर इतना परेशान होने की आवश्यकता क्या थी?

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अभी पिक्चर बाकी है दोस्त।।!!!

सलमान खान की फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' का अभी सिर्फ 1.12 मिनट का टीजर ही खबरों में आया है, यानी फिल्म थिएटरों में रिलीज होना शेष है और प्रोडक्शन हाउस व सेंसर बोर्ड के सदस्यों के अतिरिक्त आधिकारिक तौर पर उसे किसी ने देखा नहीं है, लेकिन चीन उस पर बौखला गया है और उसने फिल्म पर कड़ी आपत्ति की है। चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने लिखा है कि फिल्म में बात का बतंगड़ बनाया गया है और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत सरकार के सूत्रों ने कहा है कि सिनेमा रचनात्मक अभिव्यक्ति होती है और भारत उस पर पाबंदी नहीं लगाता है।

लेख- डॉ.अनिता राठौर के द्वारा

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