ईरान से लेकर यूक्रेन तक... म्यूनिख में चीनी विदेश मंत्री ने अमेरिका और EU को घेरा, ट्रंप को दी बड़ी नसीहत

Munich Security Conference: चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अमेरिका को ईरान के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी है। साथ ही, उन्होंने यूक्रेन संकट पर यूरोप को केवल 'तमाशबीन' न रहकर सक्रिय पहल करने को कहा।
From Iran to Ukraine... Chinese Foreign Minister attacks US and EU in Munich, offers strong advice to Trump
चीनी विदेश मंत्री वांग यी, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
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China Warns US On Iran: जर्मनी में आयोजित म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर चीन का रुख स्पष्ट किया है। चीन ने अमेरिका को कड़े शब्दों में नसीहत दी है कि वह ईरान के प्रति अपनी नीतियों में सावधानी बरते और मिडिल ईस्ट के इलाके में नए झगड़े पैदा करने से बचे।

ईरान और मिडिल ईस्ट पर चिंता

चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान के मौजूदा हालात ने पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र की स्थिरता पर गहरा असर डाला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका को ईरान के साथ अपने रिश्तों और बातचीत में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि यह स्थिति सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय शांति को प्रभावित करती है। वांग यी के अनुसार, विवादों को सैन्य ताकत के बजाय मध्यस्थता और सलाह-मशविरे के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

बढ़ती सैन्य मौजूदगी पर सवाल

चीन की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को लगातार बढ़ा रहा है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड मिडिल ईस्ट भेजने का फैसला किया है जो अगले एक सप्ताह में वहां पहुंच जाएगा। इससे पहले वहां अब्राहम लिंकन कैरियर और अन्य युद्धपोत पहले से ही तैनात हैं।

यूरोप को नसीहत

यूक्रेन युद्ध पर बोलते हुए वांग यी ने कहा कि यूरोप को इस संकट को बाहर से नहीं देखना चाहिए बल्कि उसे 'बातचीत की टेबल' पर सक्रिय रहना चाहिए। चीन ने यूरोपीय संघ (EU) से अपील की है कि वह संकट को हल करने के लिए अपनी खुद की पहल पेश करे। वांग ने स्पष्ट किया कि हालांकि चीन सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल नहीं है लेकिन वह शांतिपूर्ण बातचीत का समर्थन करता है।

चीन की भूमिका पर स्पष्टीकरण

वांग यी ने यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन संकट को सुलझाने में चीन का 'आखिरी फैसला' नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन की स्थिति साफ है कि इस झगड़े को केवल बातचीत से ही हल किया जा सकता है। बीजिंग का काम केवल शांति और संवाद को बढ़ावा देना है, न कि समाधान थोपना।

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