नवभारत निशानेबाज: बापू के देश में लॉरेंस बिश्नोई, बॉलीवुड में आतंकित हर कोई
Lawrence Bishnoi Threat: बापू का मौन ब्रिटिश हुकूमत को हिला देता था, जबकि आज बिश्नोई की खामोशी अपराध जगत में खौफ की घंटी बन चुकी है। एक मौन अहिंसा का प्रतीक था, दूसरा दहशत का संकेत।
- Written By: अंकिता पटेल
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Gangster Silence and Fear: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, बापू के देश में बिश्नोई की चर्चा है। रिश्ते में साले-बहनोई हुआ करते हैं तो गैंगस्टरों में लॉरेंस बिश्नोई का नाम मशहूर है। मुंबई की फिल्मी दुनिया उससे आतंकित है। महात्मा गांधी जब भी मौन व्रत करते थे, ब्रिटिश शासकों के हाथ-पैर फूल जाया करते थे। उस अवधि में उनके आश्रमवासी सहमे रहते थे कि न जाने आगे चलकर यह मौन कितना विस्फोटक होगा। अब बापू के मौन की परंपरा बिश्नोई निभा रहा है। उसकी खामोशी किसी की मौत की घंटी बजाने वाली सम्झी जाती है।’
हमने कहा, ‘चाहे पंजाबी सिंगर सिध्दू मूसावाला की हत्या हो या एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी का मर्डर, हर घटना से पहले लॉरेंस बिश्नोई ने 9 दिन का मौन व्रत रखा था। मौन के दौरान वह धार्मिक पुस्तकें पढ़ता है, खाना नहीं खाता और ध्यान लगाता है। मौन व्रत के मेडीटेशन में वह सबसे इशारों में बात करता है। उसकी वजह से ‘टाइगर जिंदा है’ का हीरो सलमान खान भी परेशान रहता है। रोहित शेट्टी के घर पर भी बिश्नोई गैंग ने गोलीबारी करवाई।’
पड़ोसी ने कहा, ‘यह बात समझ लीजिए कि बिश्नोई समाज काले हिरन या ब्लैक बक को अपना भगवान मानता है। लगभग 27 साल पहले फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान उसके कलाकार शिकार खेलने गए थे। काले हिरन के शिकार के बाद से सलमान खान न केवल जोधपुर की अदालत में मामले मुकदमे में फंसा बल्कि लॉरेंस बिश्नोई के निशाने पर भी आ गया। विधायक बाबा सिद्दीकी को इसलिए मारा गया क्योंकि वह सलमान खान का करीबी था। लॉरेंस का डर सलमान का पीछा नहीं छोड़ रहा है, क्योंकि जेल में रहकर भी लॉरेंस बेहद खतरनाक है। कहते हैं कि उसके पास 700 शूटर हैं। उसके इशारे पर उसके गैंग के लोग एक्टिव हो जाते हैं। लोग यह भी मानते हैं कि वह मौन धारण कर अपनी शक्ति जागृत करता है। लॉरेंस का सारा काम इनडायरेक्ट हो जाता है। उसका सिर्फ संकेत ही काफी है। लॉरेंस के मौन से सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो जाते हैं। वैसे सच तो यह है कि ईश्वर की मर्जी के बगैर पत्ता भी नहीं हिलता। भयभीत होने की बजाय रोहित शेट्टी और सलमान को मानना चाहिए कि डर के आगे जीत है!’
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लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
