निशानेबाज: आजम खान की जेल से रिहाई, यूपी की सियासत गरमाई
Azam Khan Case: आजम खान को देखिए जो सीतापुर जेल से 23 महीने बाद रिहा हुए हैं।एक ऐसा नेता जिसका मुलायमसिंह यादव के जमाने में यूपी में भारी दबदबा था।
- Written By: दीपिका पाल
आजम खान (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, मनुष्यों के पूर्वज को अलग-अलग नाम दिए गए हैं जैसे कि मनु को हिंदू अपना सर्वप्रथम पूर्वज मानते हैं वहीं ईसाई एडम और ईव को तथा मुस्लिम आदम और हौवा को अपना पुरखा मानते हैं.’ हमने कहा, ‘बाबा आजम के जमाने की बात करने की बजाय आजम खान को देखिए जो सीतापुर जेल से 23 महीने बाद रिहा हुए हैं।एक ऐसा नेता जिसका मुलायमसिंह यादव के जमाने में यूपी में भारी दबदबा था, जेल जाने को मजबूर हुआ।
योगी के राज में आजम खान को कारावास का योगायोग भोगना पड़ा.’ अपनी दुर्दशा या गम की घड़ियों में वह गा रहे होंगे- वक्त ने किया क्या हंसी सितम, हम रहे ना हम, तुम रहे ना तुम! तकदीर का फसाना जाकर किसे सुनाएं, इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं! कोई हमदम ना रहा, कोई सहारा ना रहा, हम किसी के ना रहे, कोई हमारा ना रहा!’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, एक समय वह भी था जब आजम खान चाहे जिसकी जमीन, प्रापर्टी यहां तक कि बीयर बार भी हड़प लेते थे।उनकी भैंसें गुम हुई थीं तो सारी यूपी पुलिस खोजने में लग गई थी।आजम खान मुलायम सिंह की नाक के बाल थे।
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तब यदि कोई व्यक्ति किसी यादव या मुस्लिम के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने थाने गया तो शिकायत सुनना तो दूर, पुलिस वाले उसे बुरी तरह डांट कर भगा देते थे।तब आजम खान का दावा था कि उनके पसीने से गुलाब की महक आती है।अपनी रिहाई के बाद आजम खान ने मेहदी हसन की गजल के शब्द दोहराते हुए कहा, पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जानेगा।राजनीति में वापसी के सवाल पर कहा कि अभी तो अपना इलाज कराएंगे, सेहत ठीक करेंगे।इसके बाद सोचेंगे कि क्या करना है.’
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हमने कहा, ‘आजम खान की बजाय आप के।आसिफ की 1960 में प्रदर्शित ब्लॉकबस्टर फिल्म मुगल-ए-आजम को याद कीजिए।उसमें पृथ्वीराज कपूर मुगल-ए-आजम यानी कि बादशाह अकबर बने थे।दिलीप कुमार ने शाहजादा सलीम की और मधुबाला ने अनारकली की भूमिका निभाई थी।उस फिल्म के जबरदस्त डायलॉग तब लोगों की जुबान पर चढ़ गए थे।उसमें अनारकली शहंशाह अकबर को चुनौती देते हुए गाती है- प्यार किया तो डरना क्या!’ पड़ोसी ने कहा, ‘आजम खान भी अब बेशर्मी से कहेंगे- जेल गए तो शरमाना क्या!’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
