रावण के मरने के बाद पुष्पक विमान कहां गया? सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे

Pushpak Viman Story: रामायण की कथा में रावण का अंत होने के बाद कई ऐसे रहस्य हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। उन्हीं में से एक है रावण का प्रसिद्ध पुष्पक विमान।
Pushpak Vimana go after Ravana's death You will be shocked to learn the truth.
Pushpak Viman (Source. Pinterest)
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Ravana Pushpak Viman: रामायण की कथा में रावण का अंत होने के बाद कई ऐसे रहस्य हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। उन्हीं में से एक है रावण का प्रसिद्ध पुष्पक विमान। लंका विजय के बाद इस दिव्य विमान का क्या हुआ, यह कहानी बेहद रोचक और सीख देने वाली है।

विभीषण ने क्यों दिया श्री राम को पुष्पक विमान?

रावण के वध के बाद विभीषण को लंका का राजा बनाया गया। इसके बाद उन्होंने राम, माता सीता और लक्ष्मण सहित पूरी वानर सेना को अयोध्या लौटने के लिए पुष्पक विमान भेंट किया। इसका कारण भी खास था अयोध्या तक पैदल यात्रा में बहुत समय लगता, और भरत ने यह प्रण लिया था कि अगर राम समय पर नहीं लौटे तो वे अग्नि समाधि ले लेंगे।

अयोध्या की ऐतिहासिक यात्रा

भगवान राम ने सुग्रीव, हनुमान और अपनी पूरी सेना के साथ पुष्पक विमान में बैठकर अयोध्या की ओर प्रस्थान किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने माता सीता को उन सभी स्थानों के दर्शन कराए, जहां उन्होंने वनवास के कठिन दिन बिताए थे। यह सफर सिर्फ वापसी नहीं, बल्कि यादों और भावनाओं से जुड़ा एक विशेष पल था।

न्यायपूर्ण निर्णय: असली मालिक को लौटाया विमान

अयोध्या पहुंचने के बाद श्री राम ने पुष्पक विमान को अपने पास नहीं रखा। उन्हें यह ज्ञात था कि रावण ने यह विमान अपने सौतेले भाई कुबेर से बलपूर्वक छीना था।

"न्यायपूर्ण निर्णय": श्री राम ने इस दिव्य विमान को उसके असली मालिक कुबेर को वापस भेज दिया।

कुबेर, राम की इस ईमानदारी और मर्यादा से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने यह विमान हमेशा के लिए राम को अर्पित करने की इच्छा जताई, लेकिन राम ने इसे स्वीकार नहीं किया और विमान वापस अलकापुरी चला गया।

पुष्पक विमान की खासियतें जो आपको हैरान कर देंगी

पुष्पक विमान सिर्फ एक साधारण वाहन नहीं, बल्कि एक दिव्य और अद्भुत यंत्र था:

  • आकार बदलने की क्षमता: यह जरूरत के अनुसार छोटा या बड़ा हो सकता था।
  • मन की गति से चलने वाला: यह विमान विचारों की गति से उड़ता था।
  • अद्भुत क्षमता: इसमें कितने भी लोग बैठ जाएं, एक सीट हमेशा खाली रहती थी।
  • निर्माण: इसे देवताओं के महान शिल्पी विश्वकर्मा ने ब्रह्मा जी के लिए बनाया था।

सीख क्या मिलती है?

इस पूरी कहानी से एक बड़ी सीख मिलती है शक्ति और साधन होने के बावजूद धर्म और न्याय का पालन करना ही सच्ची महानता है।

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