मोरबी पुल दुर्घटना के बाद अब राजकोट का गेमिंग जोन हादसा
- Written By: चंद्रमोहन द्विवेदी
क्या इंसान की जान की कोई कीमत ही नहीं है? गुजरात में आपराधिक लापरवाही के चलते भयानक हादसे हो रहे हैं जिनमें अमूल्य मानव प्राणों की क्षति हो रही है। ये ऐसी दुर्घटनाएं हैं जिन्हें टाला जा सकता था बशर्ते पर्याप्त सावधानी बरती जाती। ऐसे हादसे बार-बार होते हैं लेकिन उनसे कोई सबक नहीं सीखा जाता। उपक्रम शुरू करनेवालों को सिर्फ पैसा कमाने से मतलब है, जनसुरक्षा के उपाय करने की वह हमेशा अनदेखी करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के गृहराज्य गुजरात में ऐसे हृदयविदारक हादसे होना चिंताजनक है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक राजकोट के टीआरपी गेम जोन या एम्यूजमेंट पार्क में हुए भीषण अग्निकांड में मरनेवालों की तादाद 33 हो गई।
मृतकों में अनेक बच्चों का समावेश है। अधिकारियों के मुताबिक गेमिंग एक्टिविटी के लिए बनाए गए फाइबर डोम में आग लग गई थी। जाहिर है कि वहां अग्नि से सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए होंगे। जगह-जगह पर फायर एक्सटिंविशर, रेत भरी बाल्टियां और आसपास फायर ब्रिगेड का होस पाइप रहना आवश्यक है। दिल्ली के उपहार सिनेमाघर के भीषण अग्निकांड के बाद से देशव्यापी स्तर पर हर सार्वजनिक स्थल पर अग्निशमन के इंतजाम पुख्ता किए जाने चाहिए थे लेकिन किसी को इसकी तनिक भी परवाह नहीं है।
देश में फायर ब्रिगेड से एनओसी लिए बिना ही काफी ऊंची बिल्डिंग बनाने का दौर चल पड़ा है। कोई ऊपर की मंजिलों में फंस जाए तो धुएं और आग की चपेट से बच पाना मुश्किल हो जाता है। कहीं तो फायर ब्रिगेड की सीढ़ी भी नहीं पहुंच पाती। गुजरात हाईकोर्ट ने राजकोट अग्निकांड का स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे मानव निर्मित हादसा बताया है। शव इतने जल गए कि शिनाख्त भी मुश्किल है इसलिए डीएनए के नमूने लिए जा रहे हैं। एमआईटी मामले की जांच कर रही है।
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पुलिस को राज्य के सभी गेमिंग जोन का निरीक्षण करने और अग्नि सुरक्षा मंजूरी के बगैर चलाए जा रहे गेमिंग जोन को बंद करने का आदेश दिया गया है। प्रधानमंत्री ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया है। अक्टूबर 2022 में गुजरात के मारबी में 143 वर्ष पुराना पुल टूटने से भयानक हादसा हुआ था जिसमें 134 लोगों की मौत हुई थी। वह भी जबरदस्त लापरवाही की मिसाल थी।
मच्छू नदी पर बना यह पुल टूरिस्ट स्पॉट था। मरम्मत के नाम सिर्फ पुल को पेंट किया गया था। 100 लोगों की क्षमता वाले केबल ब्रिज पर 300-400 लोग पहुंच गए थे। पुल का मैनेजमेंट करनेवाली कंपनी टिकट के पैसे वसूल करती रही। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था। ये हादसे दिखाते हैं कि पैसा कमाने की धुन में प्रबंधक सुरक्षा उपायों को पूरी तरह ताक पर रख देते हैं। मानव प्राणों से यह अपराधिक खिलवाड़ कब तक चलेगा?
