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नवभारत विशेष: सरकार खाद्य मिलावट से सख्ती से निपटे, खाद्य वस्तुओं की दोहरी कीमत न रखी जाए

Fake Ghee Issue: ढाबों और भोजनालयों में मिलावटी घी और तेल के इस्तेमाल पर चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने सख्त खाद्य सुरक्षा नियम और एफएसएसएआई के कड़े नियंत्रण की जरूरत बताई है।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Apr 01, 2026 | 07:11 AM

Adulterated Ghee Problem( Source: Social Media )

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Adulterated Ghee Problem: हानिकारक तेलों और पशु-चर्चा का व्यापक रूप से इस्तेमाल सड़क किनारे के ढाबों और कुछ भोजनालयों में मक्खन के रूप में किया जाता है। केंद्र और राज्य सरकारों को इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने चाहिए, जिससे देश में मिलावटी ‘मक्खन’ का उपभोग संभव न हो सके।

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम में कुछ साल पहले लड्डुओं के पवित्र प्रसाद में मिलावटी घी के उपयोग की चौंकाने वाली घटना सामने आई थी, जिससे यह साफ हो गया है कि ऐसे निवारक कदम उठाए जाएं जिससे हलवाइयों और भोजनालयों द्वारा इस प्रकार का मिलावटी देसी घी उपयोग में न लाया जा सके।

देसी घी के निर्माता का ब्रांड-नाम और दूसरी जरूरी जानकारी अनिवार्य रूप से भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के साथ साझा की जानी चाहिए। यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि सभी खाद्य केंद्रों के संचालकों, मालिकों और प्रबंधकों का नाम और पता प्रदर्शित किया जाए, साथ ही रसोइयों और वेटरों के लिए मारक व दस्ताने पहनना अनिवार्य किया जाए, इसके साथ ही होटलों और रेस्तरां में सीसीटीवी कैमरा लगाया जाना भी जरूरी है।

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हिमाचल प्रदेश सरकार के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी इसी नियम के पालन की इच्छा जताई है। सभी राज्यों को ये कदम उठाने चाहिए। हमारे यहां भोजनालयों के भंडारों में चूहों का भागना-दौड़ना बहुत आम है, जिससे रसोई गंदी होती हैं।

एफएसएसएआई ने खाना पकाने के लिए बार-बार तले जाने वाले तेल के नियंत्रण पर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। क्योंकि बार-बार ऐसा करने यह तेल हमारे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन जाता है।

समय आ गया है कि भोजनालय चाहे कितना छोटा क्यों न हो, वहां आरओ जल-शुद्धिकरण यंत्र लगाना से जरूरी है। शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के लिए रसोई के बर्तन अलग-अलग हों, ताकि शाकाहारी लोगों को भावनाओं का सम्मान किया जा सके।

केंद्र सरकार को चाहिए कि वह योग की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शाकाहारी भोजन को बढ़ावा दे और सभी सरकारी आयोजनों में केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जाए, इसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

अयोध्या और मथुरा जैसे पवित्र शहरों में हिंदुओं की भावनाओं के अनुरूप मांस की बिक्री पहले से ही प्रतिबंधित है, वहां शाकाहार को बढ़ावा मिल रहा है। इसलिए भारत सरकार को संयुक्त राष्ट्र से संपर्क करके 1 अक्टूबर को विश्व शाकाहार दिवस मनाए जाने का अनुरोध करना चाहिए, स्कूलों और रेलगाड़ियों में ताजा पकाए गए भोजन की जगह ब्रांडेड पैक्ड खाद्य पदार्थ मिलने चाहिए।

आए दिन ऐसी रिपोर्ट्स देखने को मिलती हैं कि स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के रूप में पकाए गए चावल और दाल घटिया क्वालिटी के हैं। यहीं नहीं उनमें कीड़े-मकोड़े, मेंढक, छिपकली और चूहे तक पाए जाते हैं।

इसलिए पैक्ड भोजन ज्यादा भरोसेमंद होगा, सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2021 को केंद्र और राज्य सरकारों से उन रिपोटों पर टिप्पणी मांगी थी, जिनमें कहा गया था कि भारत में प्रसिद्ध कंपनियों के लोकप्रिय ब्रांडों में भी मिलावटी शहद बेचा जा रहा है।

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पाया गया था कि चीन से आयातित एक विशेष प्रकार की चीनी को शहद में मिलाकर एफएसएसएआई के परीक्षण मानक को भी पास किया जा सकता है। राजधानी दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट द्वारा किए गए शोध के अनुसार भारत में बेचे जा रहे शहद के 70 नमूनों में से केवल 3 ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत हो सके थे।

खाद्य वस्तुओं की दोहरी कीमत न रखी जाए

भारत सरकार की सार्वजनिक कंपनियां तमाम सुविधाएं और सब्सिडी पाकर भी कोई अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग क्यों नहीं पाती हैं। इसी संदर्भ में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन तथा मदर डेयरी के प्रबंधन से पूछा जाना चाहिए कि सार्वजनिक पैसे के भारी निवेश के बावजूद आखिर वे विश्व के शीर्ष 100 ब्रांडों में अपनी जगह क्यों नहीं बना सके? सरकार को पानी की बोतलों और खाद्य वस्तुओं की दोहरी कीमत की अनुमति भी नहीं देनी चाहिए, एक सामान्य कीमत खुले बाजार के लिए और दूसरी उड़ानों, थिएटरों और पांच सितारा होटलों के लिए, यह उपभोक्ता-विरोधी प्रथा बंद होनी चाहिए,

लेख-सुभाषचंद्र अग्रवाल के द्वारा

Adulterated ghee food safety regulations india

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Published On: Apr 01, 2026 | 07:11 AM

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