मध्यप्रदेश के इंदौर का अनोखा यशोदा मंदिर (सौ.सोशल मीडिया)
Yashoda Mata Indore Temple Story:आज 7 फरवरी 2026 को यशोदा जयंती मनाई जा रही है। खासकर वे महिलाएं जो संतान की कामना कर रही हैं, इस दिन व्रत और पूजा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां यशोदा से मन्नत मांगने से घर में शांति, रिश्तों में मिठास और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
यही वजह है कि यह पर्व आम त्योहारों से बिल्कुल अलग और भावनात्मक रूप से बेहद खास माना जाता है।यशोदा जयंती से जुड़ी आस्था सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है। भारत में एक ऐसी जगह भी है, जहां मां यशोदा की ममता को आज भी जीवित माना जाता है।
यह जगह मध्यप्रदेश का इंदौर है, जहां मां यशोदा का देश का इकलौता मंदिर मौजूद है। यहां निःसंतान दंपति के बच्चे की मन्नत पूरी होती है। यहां पढ़िए इस अनोखे मंदिर की कहानी-
इंदौर का यशोदा माता मंदिर दुनिया में अपनी तरह का अनोखा स्थल है। यहां भगवान कृष्ण, मां यशोदा की गोद में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 220 से 350 साल पुराना है और खजूरी बाजार, राजवाड़ा के पास स्थित है। इसे देश का इकलौता मंदिर माना जाता है, जहां मां यशोदा की प्रतिमा बड़ी और नंद बाबा की प्रतिमा छोटी है। इसके अलावा, यहां श्रीकृष्ण के साथ राधा और रुक्मणी जी की प्रतिमाएं भी हैं, जो इसे और भी विशेष बनाती हैं।
मध्यप्रदेश के इंदौर के यशोदा माता मंदिर की खास मान्यता है कि निःसंतान महिलाएं यहां मां यशोदा की गोद भरती हैं। ऐसा करने से माना जाता है कि मां यशोदा उनकी सूनी गोद भर देती हैं। यही वजह है कि हर साल देश-विदेश से महिलाएं अपनी संतान की कामना लेकर इस मंदिर आती हैं।
खास बात यह है कि यहां गोद भराई की रस्म संतान प्राप्ति से पहले की जाती है, जबकि आम तौर पर यह रस्म प्रेग्नेंसी के बाद होती है। जब भक्ताओं की मन्नत पूरी हो जाती है, तो वे अपनी संतान के साथ फिर से मंदिर आकर धन्यवाद स्वरूप पुनः गोद भराई करती हैं।
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इंदौर के यशोदा मंदिर में हर गुरुवार महिलाएं चावल, नारियल, चुनरी और पूजन सामग्री लेकर मां यशोदा की गोद भरती हैं। पुजारी विधि-विधान से पूजा करवाते हैं और माना जाता है कि मां यशोदा अपने पुत्र कृष्ण जैसे संस्कारवान संतान का आशीर्वाद देती हैं।
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन इंदौर का यशोदा माता मंदिर खास रौनक लिए रहता है। इस दिन भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और अन्य राज्यों से महिलाएं यहां पहुंचती हैं। कई श्रद्धालु विदेशों से भी दर्शन करने आते हैं। सालभर लोग आते रहते हैं, लेकिन जन्माष्टमी पर विशेष पूजा और गोद भराई की जाती है।