निसंतानों के लिए क्यों है यशोदा जयंती का बड़ा महत्व? पूजा फलित होने के लिए इस विशेष शुभ मुहूर्त में करें पूजा
Maa Yashoda: यशोदा जयंती निसंतान दंपतियों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से मां यशोदा की कृपा से संतान सुख और परिवार में खुशहाली आती है।
- Written By: सीमा कुमारी
माता यशोदा और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप(सौ.सोशल मीडिया)
Yashoda Jayanti 2026 Kab Hai:मां यशोदा के जन्मोत्सव के रूप में यशोदा जयंती का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल यह जयंती 07 फरवरी 2026, शनिवार के दिन मनाया जाएगा। हिंदू लोक मान्यता के अनुसार, यशोदा जयंती के दिन विधि-विधान से भगवान माता यशोदा और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करने पर विवाहित स्त्रियों की सूनी गोद भरती है।
ऐसी मान्यता है कि, यशोदा जयंती के दिन रखे जाने वाले जिस व्रत से संतान सुख की प्राप्ति होती है, आइए उसके बारे में विस्तार से जानते हैं-
कब है? यशोदा जयंती
पंचांग के अनुसार, जिस फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती के नाम से जाना जाता है, वह इस साल 07 फरवरी 2026, शनिवार के दिन पूर्वाह्न 01:18 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 08 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 02:54 बजे समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार यशोदा जयंती का व्रत और पूजन 07 फरवरी 2026 को किया जाएगा।
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कैसे करें यशोदा जयंती की पूजा
- यशोदा जयंती के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से मां यशोदा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा की विधि इस प्रकार है-
- प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करें और तन–मन से शुद्ध हो जाएं।
- इसके बाद मां यशोदा का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत करने का संकल्प लें।
- पूजा घर या घर के ईशान कोण में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर मां यशोदा तथा भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- गंगाजल या शुद्ध जल से स्थान को पवित्र करें।
- रोली, चंदन, हल्दी, धूप, दीप, फल, तुलसी दल और मिष्ठान भगवान श्रीकृष्ण व मां यशोदा को अर्पित करें।
- विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
- इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के मंत्र का जप करें या गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करें।
- पूजा के अंत में मां यशोदा और भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें।
- सभी को प्रसाद वितरित करें और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।
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संतान प्राप्ति के लिए क्यों खास है यह व्रत?
यशोदा जयंती का व्रत मुख्य रूप से माताओं के लिए फलदायी माना गया है। जो महिलाएं संतान सुख से वंचित हैं या जिनकी संतान के जीवन में कष्ट हैं, उनके लिए यह दिन किसी वरदान से कम नहीं है।
