

Tulsidas Birth Place: अक्सर लोग एक बड़ी गलती कर बैठते हैं वे रामचरितमानस के रचयिता को महर्षि वाल्मीकि मान लेते हैं। अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो आज इसका साफ जवाब जान लीजिए। दरअसल, रामचरितमानस की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी, जबकि महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत में रामायण की रचना की थी, जिसे आदिकाव्य कहा जाता है।
महर्षि वाल्मीकि के जन्म को लेकर कोई पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। अलग-अलग पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के आधार पर उनके जीवन के बारे में जानकारी मिलती है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, उनका जन्म एक भील परिवार में हुआ था। बाद में कठोर तपस्या और साधना के जरिए वे एक महान ऋषि बने और उन्होंने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना की।
वाल्मीकि जी के जन्म स्थान को लेकर भी विद्वानों में एकमत नहीं है। कुछ लोग उन्हें बिठूर उत्तर प्रदेश से जोड़ते हैं, जबकि कुछ अन्य स्थानों का भी उल्लेख मिलता है। यानी उनके जन्म का सही स्थान और समय आज भी शोध और मान्यताओं का विषय बना हुआ है।
जहां तक रामचरितमानस की बात है, इसे गोस्वामी तुलसीदास ने अवधी भाषा में लिखा था। उनके जन्म को लेकर भी अलग-अलग मत हैं, लेकिन आमतौर पर माना जाता है कि उनका जन्म 1532 ईस्वी में हुआ था। उनके जन्मस्थान को लेकर भी दो प्रमुख जगहों का जिक्र होता है सोरों और राजापुर।
लोगों में भ्रम इसलिए होता है क्योंकि दोनों ही ग्रंथ भगवान राम की कथा पर आधारित हैं।
ऐसी धार्मिक और ऐतिहासिक जानकारियों को सही तरीके से समझना जरूरी है, ताकि भ्रम दूर हो सके। अगर आप भी अब तक इस सवाल में उलझे थे, तो अब साफ हो गया होगा कि रामचरितमानस किसने लिखी और वाल्मीकि जी का योगदान क्या है।