(सौजन्य सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क : सावन का पहला सोमवार 22 जुलाई 2024 को पड़ रहा है और इसी दिन से सावन माह की शुरुआत भी हो रही है। महादेव को समर्पित सावन का पवित्र महीना सनातन धर्म में बड़ा महत्व रखता है। वैसे तो पूरे साल ही शिव भक्त भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन सावन के महीने की बात ही अलग है। मान्यता है कि सावन के सोमवार के व्रत करने से व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं।
सावन सोमवार के व्रत करने का विशेष महत्व है और ऐसी मान्यता है कि इन्हें करने वाले साधक को भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अगर आप भी इस सावन में सोमवार के व्रत करने जा रहे हैं तो यहां व्रत करने की विधि और पूजा को दौरान इस्तेमाल होने वाली पूजा सामग्री के बारे में बताया गया है।
सावन सोमवार के व्रत की पूजा में इन सामग्रियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये सामग्रियां हैं- कच्चा दूध, गंगाजल, दही, घी, फल, चंदन, बेलपत्र, अक्षत, इत्र, पंचमेवा, भस्म, रुद्राक्ष, शहद, भांग, धतूरा, शक्कर, लौंग, इलायची, केसर, शमी पत्र, पान, सुपारी, काला तिल, कपूर, धूप, दीप, हरसिंगार, आक या कनेर के फूल आदि। भगवान शिव को हरसिंगार, आक और कनेर के फूल विशेष रूप से प्रिय हैं। इसके अलावा सोमवार की व्रत कथा पुस्तक भी जरूर रखें और पूजा के दौरान इसका पाठ करें।
1- व्रती को व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठ जाना चाहिये। नित्य क्रियाओं से निवृत होकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
2- संभव हो तो सफेद रंग या हल्के रंग के कपड़े पहने। काले या गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचें।
3– पूजा स्थल पर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें तथा धूप दीप जलाएं। भगवान के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
4- इसके बाद शिवलिंग का पंचामृत या गंगा जल या सामान्य जल से अभिषेक करें।
5- भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, गंगाजल , चन्दन, चावल, दूध और फूल आदि अर्पित करें।
6- भगवान को सफेद चंदन का तिलक लगाएं।
7- इसके बाद भगवान को भोग लगायें।
8- भोग लगाने के बाद सोमवार व्रत कथा का पाठ करें।
9- पाठ के बाद शिव का ध्यान करते हुये उनके मंत्रों का जाप करें।
10- अंत में भगवान की आरती करें।
11- शिवपूजा में हल्दी, रोली और तुलसी का पत्र का भूलकर भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिये।
12– पूजा पूरी होने के बाद सभी को प्रसाद बांटें।
मान्यता है कि जो कोई स्त्री-पुरुष सावन सोमवार का व्रत करते हैं उनको वैवाहिक जीवन की सभी समस्याओं से निजात मिलती है। अविवाहितों को यह व्रत करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। भोलेनाथ की कृपा से सदैव साधक की रक्षा होती है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान साधकों को स्वास्थ्य लाभ होता है। संतानहीन साधकों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि सावन सोमवार के व्रत करने से भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव और चंद्र देव की कृपा भी मिलती है। कई तरह के ग्रह दोष भी इस व्रत को करने से समाप्त हो जाते हैं और जीवन में खुशहाली और तरक्की मिलती है। साथ ही आर्थिक परेशानियों का अंत भी होता है।