स्कंद षष्ठी व्रत 2024 (सौ.सोशल मीडिया)
हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का काफी महत्व होता है आज स्कंद षष्ठी का व्रत मनाया जा रहा है जो भगवान कार्तिकेय की पूजा को समर्पित होता है। भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और देवी पार्वती के छठे पुत्र और भगवान गणेशजी के बड़े भाई है। स्कंद षष्ठी की तिथि कुछ क्षेत्रों में खास होतो है तो वहीं पर आज के दिन भगवान सूर्यदेव की पूजा करने का विधान भी होता है। कहते हैं अगर आप भगवान सूर्यदेव की पूजा करते है तो लोगों को इसका लाभ मिलता है और घर में सुख और समृद्धि का दौर बना रहता है।
हिंदू पंचाग के अनुसार, भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत 08 सितंबर को रात 07 बजकर 58 मिनट पर की मानी गई है जिसकी शुरुआत के बाद तिथि का समापन 09 सितंबर को रात 09 बजकर 53 मिनट पर हो रहा है।
स्कंद षष्ठी व्रत में भगवान कार्तिकेय की पूजा की विधि होती है जो इस प्रकार है…
पूजा के लिएसुबह जल्दी उठकर शुद्ध जल से स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
इसके बाद आप एक साफ स्थान पर भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें।
इसके बाद मूर्ति के सामने एक चौकी या पलंग पर लाल कपड़ा बिछाएं।
इसके बाद मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती या धूप जलाएं.
इसके बाद भगवान कार्तिकेय को फल और फूल चढ़ाएं. विशेषकर कमल का फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है.
इसके बाद भगवान कार्तिकेय की मूर्ति पर रोली का तिलक लगाएं.
भगवान कार्तिकेय को प्रसाद चढ़ाएं, प्रसाद में आप मोदक, फल, दूध आदि चढ़ा सकते हैं.
भगवान कार्तिकेय की आरती करें और पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें.
आज के दिन आप किसी मंदिर में जाकर भगवान कार्तिकेय के दर्शन कर सकते है।
आज के दिन इस स्कंद षष्ठी व्रत को करने से कई प्रकार के लाभ मिलते है। इस व्रत को संतान प्राप्ति के लिए खास माना जाता है। आपके जीवन में धन और वैभव की कमी है तो आपको भी स्कंद षष्ठी का व्रत रखना चाहिए। संतान की लंबी आयु और दुश्मनों से सामना करने के लिए यह व्रत रखा जाता है। कहते है, स्कंद षष्ठी के दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से भगवान कार्तिकेय की विशेष कृपा प्राप्त होती है और यह व्रत लोगों को शनि दोष से भी मुक्ति दिलाता है।