

Hindu Beliefs About Yawning: हिंदू धर्म में ज्यादातर लोगों के दिन की शुरुआत पूजा-पाठ और भक्ति से ही होती है। यह आत्म शुद्धि का सबसे प्रभावशाली तरीका माना जाता है। सुबह-सुबह पूजा-पाठ करने से मन-मस्तिष्क ऊर्जावान बना रहता है और मन में सकारात्मक विचार आते हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि जैसे ही कोई व्यक्ति दीपक जलाकर मंत्र जाप, ध्यान या पूजा करने बैठता है, उसे बार-बार जम्हाई आने लगती है।
आमतौर पर इसे थकान, नींद या आलस से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता इसके पीछे कई गूढ़ कारण बताते हैं। आइए जानते हैं क्या है पूजा के दौरान जम्हाई आने के कारण।
शास्त्र के अनुसार, जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से पूजा-पाठ, मंत्र जाप या ध्यान करता है, तो उसके आसपास हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और शरीर व मन से नकारात्मक विचार, मानसिक तनाव व तामसिक ऊर्जा समाप्त होने लगती है।
ऐसे में सकारात्मक ऊर्जा शरीर में प्रवेश करते हुए मन में बैठे निगेटिव एनर्जी को बाहर निकालती है और बार-बार जम्हाई का आना इसी बात का संकेत है।
मनुस्मृति के आचार कांड के अनुसार, कई बार व्यक्ति का शरीर तो पूजा में बैठा होता है, लेकिन उसका मन उसके जीवन में चल रही उलझनों में उलझा रहता है। सांसारिक चिंताओं, व्यापार, नौकरी या पारिवारिक जिम्मेदारियों में उलझा मन ध्यान लगा पाने में सक्षम नहीं होता है। ऐसे में मन में संघर्ष की स्थिति पैदा होती है। इससे एकाग्रता में कमी और अस्थिरता बढ़ती है, जिससे जम्हाई आने लगती है।
अगर पूजा के दौरान बार-बार जम्हाई आ रही है, तो आचमन करें या अपने दाहिने कान को स्पर्श करें। माना जाता है कि दाहिने कान में देवताओं का वास होता है और इसे स्पर्श करने से शुद्धि प्राप्त होती है।
जम्हाई लेते समय मुंह को खुला न छोड़ें। हाथ से मुंह ढकें और परंपरा के अनुसार उंगलियां चटकाएं।
पूजा शुरू करने से पहले कुछ गहरी सांसें लें। इससे आलस्य कम होता है और मन एकाग्र होने में मदद मिलती है। साथ ही, पूजा करते समय रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर बैठें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है।