आखिर क्यों सुहागिन महिलाए नहीं करती देवी धूमावती की पूजा, जानिए इसके पीछे छिपा कारण
धूमावती जयंती इसलिए मनाई जाती है, क्योंकि इस दिन ही देवी धूमावती की उत्पत्ति हुई थी। यह देवी धूमावती जयंती मनाने या माता धूमावती की पूजा करने से नकारात्मकता दूर होती है और शत्रुओं का नाश होता है।
- Written By: दीपिका पाल
माता धूमावती की पूजा (सौ. सोशल मीडिया)
हिंदू धर्म में कई व्रत और त्योहारों का महत्व है। जहां पर आज 3 जून को धूमावती जयंती मनाई जा रही है जो हर साल हिंदू पंचाग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को धूमावती जयंती मनाई जाती है। आज मंगलवार होने के साथ ही बड़ा मंगल भी मनाया जा रहा है जिसका भी हिंदू धर्म में महत्व होता है।
धूमावती जयंती इसलिए मनाई जाती है, क्योंकि इस दिन ही देवी धूमावती की उत्पत्ति हुई थी। यह देवी धूमावती जयंती मनाने या माता धूमावती की पूजा करने से नकारात्मकता दूर होती है और शत्रुओं का नाश होता है। लेकिन कहा जाता है कि, सुहागिन महिलाएं माता धूमावती की पूजा नहीं करती है।
कभी नहीं करती महिलाएं माता धूमावती की पूजा
हिंदू धर्म के अनुसार मानें तो, कई व्रत को सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और पति की दीर्घायु के लिए कई व्रत रखती हैं। जहां पर व्रत रखने से सुखी और वैवाहिक जीवन की कामना करती है। धूमावती जयंती के दिन दरअसल महिलाएं देवी धूमावती की पूजा कभी नहीं करतीं। इसे लेकर कई कारण बताए गए है जिस वजह से महिलाएं माता धूमावती की पूजा नहीं करती है।
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विकराल रूप में मानी जाती हैं माता धूमावती
सुहागिन महिलाओं द्वारा माता धूमावती की पूजा नहीं करने का कारण बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, देवी धूमावती को लक्ष्मीजी की बहन माना जाता है, इनका एक नाम अलक्ष्मी भी है। कहा जाता है कि, माता धूमावती का स्वरूप विकराल और विधवा स्त्री के रूप में होता है। इस वजह से सौभाग्य में कमी आने की दृष्टि से विवाहित महिलाएं धूमावती देवी की पूजा नहीं करती है।
जानिए इसके पीछे का पौराणिक कारण
आपको पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवी पार्वती को अत्यधिक भूख लगी और उन्होंने विकराल रूप धारण कर शिवजी को ही निगल लिया, जिसके बाद उनका रूप विधवा हो गया। पार्वती के इसी विकराल रूप से देवी धूमावती की उत्पत्ति हुई थी. इसलिए सुहागिन महिलाएं कभी भी देवी धूमावती की पूजा नहीं करती है। इसे लेकर शास्त्रों में यह भी बताया जाता है कि, मां पार्वती का देवी धूमावती का रूप धारण करना भी शिवजी की लीला ही थी। लेकिन वास्तव में महिलाएं वैराग्य की दृष्टि से देवी धूमावती की पूजा नहीं करती है।
