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जन्माष्टमी पर दही-हंडी फोड़ने की परंपरा क्यों है, जानिए श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की यह रोचक गाथा
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानि जन्माष्टमी पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह भी भगवान के जन्म का खास दिन होता हैं इस मौके पर दही हांडी फोड़ने के नियम होते है, जानिए आखिर कब शुरू हुई इसकी परंपरा।
- Written By: दीपिका पाल

जन्माष्टमी पर दही हांडी का महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
सनातन धर्म में कई तीज-त्योहार मनाए जाते है। इन्हीं में से एक ‘श्रीकृष्ण जन्माष्टमी’ (Krishna Janmashtami 2024) का पावन व्रत भी। भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव यानी ‘जन्माष्टमी’ (Krishna Janmashtami) का महापर्व हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन पूरे देश भर में धूमधाम एवं हर्षोल्लास से मनाई जाती है।
इस वर्ष 26 अगस्त को पूरे देशभर में मनाई जाएगी। ‘कृष्ण जन्माष्टमी’ (Krishna Janmashtami) त्योहार भगवान श्री कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो हिंदुओं द्वारा पूजे जाने वाले सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं।
जानिए जन्माष्टमी से जुड़ी खास बातें
मान्यता है कि जन्माष्टमी का व्रत (Janmashtami Fast) रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
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1- प्राप्त जानकारी के अनुसार, जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर दही-हांडी (Dahi Handi) उत्सव मनाने की एक विशेष परंपरा भी सदियो से चलती आ रही है। जो आज भी कायम है। इस उत्सव में युवा टोलियां बनाकर ऊंचाई पर बंधी दही-हांडी फोड़ते हैं।
2- ये परंपरा किसने शुरू की, इस बात का जानकारी तो नहीं मिलती, लेकिन किसी समय छोटे से स्तर से शुरू हुई ये परंपरा आज पूरे देश में बड़े स्तर पर निभाई जाती है। खासकर, महाराष्ट्र में इसका उत्साह देखते ही बनता है।
3- इस परंपरा के पीछे भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की घटनाएं हैं। इस परंपरा के पीछे लाइफ मैनेजमेंट के कई सूत्र भी छिपे हैं। आइए जानें क्या है दही हांडी उत्सव और क्यों मनाया जाता है ये पर्व-
4- श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, बाल्यकाल में भगवान श्रीकृष्ण अपने दोस्तों के साथ मिलकर लोगों के घरों से माखन चुराकर अपने मित्रों को खिला देते हैं और स्वयं भी खाते थे। जब यह बात गांव की महिलाओं को पता चली तो उन्होंने माखन की मटकी को ऊंचाई पर लटकाना शुरू कर दिया, जिससे श्रीकृष्ण का हाथ वहां तक न पहुंच सके।
5- लेकिन, नटखट कृष्ण की समझदारी के आगे उनकी यह योजना भी व्यर्थ साबित हुई। माखन चुराने के लिए श्रीकृष्ण अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक पिरामिड बनाते और ऊंचाई पर लटकाई मटकी से दही और माखन चुरा लेते थे। इसी से प्रेरित होकर दही-हांडी का चलन शुरू हुआ।
6-दही-हांडी पूरे भारत में सबसे मशहूर है। खासकर गुजरात, द्वारका, महाराष्ट्र के हर गली-मुहल्ले में दहीं हांडी की प्रतियोगिता रखी जाती है। यहां मटकी में दही के साथ घी, बादाम और सूखे मेवे भी डाले जाते हैं, जिसे युवाओं की टोली मिलकर तोड़ती है। वहीं लड़कियों की एक टोली गीत गाती हैं और उन्हें रोकने की कोशिश करती हैं।
7- ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, मक्खन एक तरह से धन का प्रतीक है। जब हमारे पास आवश्यकता से अधिक धन हो जाता है तो उसे हम संचित यानी इक्ट्ठा कर लेते हैं जबकि होने ये चाहिए धन अधिक होने पर पहले उसका कुछ भाग जरूरतमंदों को दान करें।
8-श्रीकृष्ण माखन चुराकर पहले अपने उन मित्रों को खिलाते थे जो निर्धन थे। श्रीकृष्ण कहते हैं कि यदि आपके पास कोई वस्तु आवश्यकता से अधिक है तो पहले उसका दान करो, बाद में उसका संचय करो। इस बात का ध्यान सभी को रखना चाहिए।
9- माखन और दही खाने से जुड़ा एक अन्य लाइफ मैनेजमेंट ये भी है कि बाल्यकाल में बच्चों को सही पोषण मिलना अति आवश्यक है। दूध, दही, माखन आदि चीजें खाने से बचपन से ही बच्चों का शरीर सुदृढ़ रहता है और वे आजीवन तंदुरुस्त बने रहते हैं।
लेखिका- सीमा कुमारी
Why is there a tradition of breaking dahi handi on janmashtami
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