जगन्नाथ रथ यात्रा में सोने की झाड़ू से क्यों होती है मार्ग की सफाई, जानिए क्या है परंपरा
जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां दो महीने पहले ही शुरू हो जाती हैं। जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले सोने की झाड़ू से रास्ते की सफाई करना एक प्राचीन परंपरा है जिसके पीछे कई धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
जगन्नाथ रथ यात्रा(सौ.सोशल मीडिया)
नौ दिवसीय भगवान जगन्नाथ यात्रा 27 जून से होने जा रही है। जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म का एक भव्य और श्रद्धा से परिपूर्ण पर्व है, जिसे हर साल ओडिशा के पुरी शहर में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। यह उत्सव भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित होता है।
पंचांग के मुताबिक, हर साल इस शुभ यात्रा की शुरुआत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से होती है। आपको बता दें, इस यात्रा के दौरान कई ऐसी परंपराओं को निभाया जाता है जो कि प्राचीन काल से चली आ रही है।
इन परंपराओं का अपना एक खास महत्व और आस्था है। इन्हीं परंपराओं में से एक है रथ यात्रा के दौरान सोने की झाड़ू का उपयोग। ऐसे में आइए इस लेख में जानते हैं कि जगन्नाथ यात्रा में सोने की झाड़ू से सफाई करने का क्या धार्मिक सांस्कृतिक महत्व है।
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आखिर क्यों रथ यात्रा में सोने की झाड़ू से सफाई
जानकारों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ जी की भव्य रथ यात्रा में शामिल होने के लिए देश-दुनिया से भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। इस दौरान रथ यात्रा शुरू होने से पहले साफ-सफाई की जाती है और सफाई के लिए साधारण झाड़ू का नहीं, बल्कि सोने की झाड़ू का उपयोग किया जाता है।
सोने की झाड़ू से सफाई पूरी यात्रा के दौरान रथ के आगे सोने की झाड़ू से सफाई की जाती है। सबसे बड़ी खास बात है कि प्राचीन काल से यह परंपरा केवल राजाओं के वंशज ही निभाते आ रहे हैं और आज भी पूरे मंत्रोच्चारण के साथ इस परंपरा को निभाया जाता है।
सोने की कुल्हाड़ी से काटी जाती है लकड़ियां
जानकारों का मानना है कि, रथ बनाने के लिए जिस लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है उसे काटने के लिए सोने की कुल्हाड़ी उपयोग हो होती है। पहले सोने की कुल्हाड़ी को भगवान के आशीर्वाद के लिए मंदिर में रखा जाता है और फिर उस कुल्हाड़ी से रथ के लिए लकड़ियां काटी जाती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे आज भी पूरे रीति-रिवाजों के साथ निभाया जाता है।
