Pola 2025: क्यों बैलों का त्योहार महाराष्ट्र में माना जाता इतना है खास, जानिए परंपरा से लेकर सबकुछ
Pola Festival in Maharashtra: यह त्योहार किसानों का बैलों औऱ गायों के बीच का जो संबंध है उसे व्यक्त करता है। इस त्योहार का खासियत औऱ परंपराएं काफी पुरानी है जिसे आज भी उत्साह के साथ मनाया जाता है।
- Written By: दीपिका पाल
बैल पोला पर्व (सौ. सोशल मीडिया)
2025 Pola Festival 2025: हिंदू धर्म में हर व्रत और त्योहार का महत्व होता है। इसमें ही बैल पोला आने वाले दिन भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि यानि 23 अगस्त को मनाया जाएगा। यह त्योहार महाराष्ट्र का प्रमुख त्योहार होता है तो इसे छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में भी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार किसानों का बैलों औऱ गायों के बीच का जो संबंध है उसे व्यक्त करता है। इस त्योहार का खासियत औऱ परंपराएं काफी पुरानी है जिसे आज भी नए दौर में उत्साह के साथ मनाया जाता है।
चलिए जानते हैं बैल पोला से जुड़ी जानकारी
बैल पोला का त्योहार सबसे खास त्योहार में से एक है। इस पोला के दिन बैलों को विशेष रूप से सजाया जाता है। इस मौके पर उनके सींगों को रंगा जाता है, और उन पर गुब्बारे बाँधे जाते हैं।बैलों के पैरों में चूड़ियाँ और गले में घंटियाँ पहनाई जाती हैं, जिससे उनकी सजावट और भी आकर्षक हो जाती है। बताया जाता है कि, बैलों को नहलाकर उन्हें पूरे गाँव में घुमाया जाता है, और इस दौरान उनका जुलूस निकाला जाता है।
सम्बंधित ख़बरें
Manorath Dwitiya Vrat 2026: भगवान कृष्ण को समर्पित व्रत से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, जानें पूजा विधि और महत्व
Jagannath Rath Yatra: हर साल नए बनाए जाते हैं प्रभु जगन्नाथ के रथ, जानिए 58 दिनों तक चलने वाली अद्भभुत परंपरा
Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष कब से शुरू होगा? जानें श्राद्ध की तिथियां, महत्व और पितृ दोष शांति मंत्र
Hanuman Chalisa Benefits: रोज हनुमान चालीसा का पाठ करने से मिल सकते हैं ये 5 आध्यात्मिक लाभ, मन होगा शांत
बैल पोला से जुड़ी पौराणिक कथा
यहां पर बैल पोला से जुड़ी पौराणिक कथा का उल्लेख मिलता है। इस कथा के अनुसार, ‘भगवान श्रीकृष्ण जब गोकुल में रहते थे तो उन्हें मारने के लिए एक दिन कंस ने एक भयानक राक्षस को भेजा। उस राक्षस का नाम पोलासुर था। श्रीकृष्ण को मारने के लिए पोलासुर ने बैल का रूप ले लिया और पशुओं के बीच में जाकर छिप गया। लेकिन कान्हा ने उस राक्षस को पहचान लिया और मौका मिलते ही उसका वध कर दिया। तभी से बैल पोला का पर्व मनाया जा रहा है।
जानिए किसान और बैल के बीच का संबंध (सौ. सोशल मीडिया)
जानिए किसान और बैल के बीच का संबंध
यहां पर बैल पोला को किसान और बैल के बीच के संबंध के रूप में जाना जाता है। किसान का सबसे अच्छा साथी बैल होता है जिसके लिए किसान उपवास रखते है। बैलों को विशेष भोजन, जैसे पूरनपोली, खिलाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। इसके अलावा बैल पूजा के बाद ही किसान अपना उपवास तोड़ते हैं। इस तरह से त्योहार बैल पोला न केवल बैलों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है, बल्कि यह त्योहार किसान और उसके बैल के बीच के गहरे संबंध का प्रतीक भी है। इस दिन बैलों को खास तौर पर बनाई गई बाजरे की खिचड़ी खिलाई जाती है।
ये भी पढ़ें- गणेश चतुर्थी 2025: यहां मिलेगी A-Z जानकारी के साथ पूजा-विधि, व्रत नियम और धार्मिक महत्व
किसान एक स्थान पर इकट्ठा होते हैं और बैलों का जुलूस निकालते हैं। इस दिन घरों में खान व्यंजन बनाने की परंपरा भी है। मीठे व्यंजन में गुड़ के ठठेरे बनाए जाते है जो बैल को भोग में दिए जाते है। कृषि के लिए बैल का होना सबसे जरुरी है।
