शरद पूर्णिमा के दिन क्यों बनाई जाती है खीर, जानिए क्या है इसका श्रीकृष्ण जी से संबंध
Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा पर रात को चांद की रोशनी में चावल की खीर बनाकर रखने की परंपरा है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन अमृत वर्षा होती है और उसका अंश पाने के लिए चांद के नीचे खीर को रखा जाता है।
- Written By: सीमा कुमारी
शरद पूर्णिमा के दिन क्यों बनती है ‘खीर’ (सौ.सोशल मीडिया)
Sharad Purnima Par Kheer Kyon Bnate Hai: 6 अक्टूबर 2025 को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। आश्विन माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। वैसे तो, सनातन धर्म में सभी पूर्णिमा का विशेष महत्व है, लेकिन शरद पूर्णिमा को सभी पूर्णिमा में श्रेष्ठ माना जाता है।
इस शुभ तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही, श्रद्धा अनुसार गरीब लोगों में अन्न, वस्त्र और धन का दान किया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ कार्यों को करने से जातक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है।
सम्बंधित ख़बरें
Bade Mangal Upay : आज चौथे बड़े मंगल की शाम करना न भूलें ये महाउपाय, हनुमान जी करेंगे हर अधूरी मनोकामना पूरी
Bade Mangal 2026: चौथे बड़े मंगल पर आज भूल से भी न करें ये काम, भुगतना पड़ सकता है भारी नुकसान
Malmas Rituals : मलमास में ज़रूर करें ये काम, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद, खुशहाल रहेगा घर बार
Cockroach Spiritual Meaning: घर में घूम रहे हों कॉकरोच, तो हो जाएं सचेत, राहु-केतु से है इसका संबंध
साथ ही, आपको बता दें, शरद पूर्णिमा की रात्रि को चन्द्रमा की रोशनी में खीर बनाने की भी परंपरा सदियों से चली आ रही है। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है। अगर नहीं, तो यहां पढ़ें शरद पूर्णिमा और खीर की परंपरा से जुड़ी बातें।
शरद पूर्णिमा के दिन क्यों बनती है ‘खीर’
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, हर साल शरद पूर्णिमा के पर्व को धन की देवी मां लक्ष्मी का प्राकट्योत्सव के रूप में बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी उत्पन्न हुई थीं।
वहीं, दूसरी मान्यता है कि द्वापर युग में जगत के पालनहार भगवान श्रीकृष्ण ने धवल चांदनी में महारास किया था। इससे चंद्र देव ने प्रसन्न होकर अमृत की वर्षा की थी। इसी वजह से शरद पूर्णिमा को चन्द्रमा की रोशनी में खीर को रखा जाता है, जिससे उस खीर में अमृत मिल जाता है। अगले दिन इसका सेवन किया जाता है।
धार्मिक मत है कि खीर का सेवन करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और जातक पर सदैव अपनी कृपा बनाए रखती हैं।
शरद पूर्णिमा के दिन क्या दान करना चाहिए
ज्योतिषयों के अनुसार, शरद पूर्णिमा को सभी पूर्णिमा में श्रेष्ठ माना जाता है। इस शुभ भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करने के साथ श्रद्धा अनुसार गरीब लोगों में अन्न, वस्त्र और धन का दान करना शुभ माना जाता है।
चावल का दान
इस दिन गेहूं और चावल का दान करना शुभ माना जाता हैं। कहा जाता है कि चावल दान करने से चंद्रमा देव का आशीर्वाद और गेहूं दान करने से सूर्य देव का आशीर्वाद मिलता है। इससे भक्तों के भंडार हमेशा अनाज से भरे रहते हैं।
इसे भी पढ़ें-करवा चौथ के व्रत में बिल्कुल न करें ये गलतियां, वरना टूट जाएगा व्रत!
सफेद कपड़े का दान
इस दिन चंद्रमा की रोशनी में रखा खीर प्रसाद के रूप में लोगों में बांटना शुभ होता है।शरद पूर्णिमा के मौके पर खासकर सफेद रंग के कपड़े का दान करना चाहिए।
गुड़ का दान
इस दिन गुड़ का दान करना भी बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से आर्थिक स्थिति में सुधार आता है।
