आ गई शरद पूर्णिमा की सही तिथि, अक्टूबर में इस दिन, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Sharad Purnima kab hai : शरद पूर्णिमा को सभी पूर्णिमाओं में सबसे विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अमृत बरसाता है और मां लक्ष्मी की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
आ गई शरद पूर्णिमा की सही तिथि, अक्टूबर में इस दिन, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
कब है शरद पूर्णिमा 2025 (सौ.सोशल मीडिया)
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Sharad Purnima 2025: सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। आश्विन माह में पड़ने वाली शरद पूर्णिमा का खास महत्व है। इस साल यह पूर्णिमा 06 अक्टूबर को मनाया जाएगा। जिसे शरद पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह साल की सबसे महत्वपूर्ण तिथि होती, जब लोग विभिन्न तरह के पूजा अनुष्ठान का पालन करते हैं, क्योंकि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होते हैं, तो आइए यहां इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

कब है शरद पूर्णिमा 2025

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 06 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 07 अक्टूबर को सुबह को 09 बजकर 16 मिनट पर होगा। पंचांग गणना के आधार पर इस साल शरद पूर्णिमा का पर्व 06 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

जानिए क्या रहेगा शरद पूर्णिमा स्नान-दान समय

ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 39 मिनट से 05 बजकर 28 मिनट तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त 10 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 09 मिनट तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 12 बजकर 09 मिनट से 01 बजकर 37 मिनट तक।

  • ऐसे करें शरद पूर्णिमा पूजा

  • इस दिन पवित्र नदी या फिर घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • साफ वस्त्र धारण करें।
  • व्रत व पूजा का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करें।
  • उन्हें सुंदर वस्त्र, फल, फूल, अक्षत, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
  • गाय के दूध से खीर बनाकर भोग तैयार करें।
  • इस दिन चंद्र देव को अर्घ्य जरूर दें।
  • अर्घ्य में दूध, चावल और सफेद फूल मिलाएं।
  • अगले दिन सूर्योदय से पहले उस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
  • पूर्णिमा के दिन अन्न, वस्त्र, चावल, दूध, मिठाई और दक्षिणा का दान जरूर करें।

 क्या है शरद पूर्णिमा का महत्व

सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस तिथि पर रात के समय चंद्रमा की चांदनी में खीर या दूध रखने से वह अमृत के समान हो जाता है।

यह खीर प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और निरोगी काया मिलती है। इस शुभ घड़ी पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है, जिससे धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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