संगम में स्नान क्यों माना जाता है अमृत समान? पुराण और विज्ञान क्या कहते हैं

Prayagraj Magh Mel: हिंदू धर्मग्रंथों में प्रयागराज को 'तीर्थराज' यानी सभी तीर्थों का राजा कहा गया है। मत्स्य पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, सृष्टि की रचना से पूर्व ब्रह्मा जी ने की थी।
Why is bathing at the confluence of rivers considered equivalent to drinking nectar? What do the Puranas and science say?
Prayagraj Sangam (Source. AI)
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Tirthraj Prayagraj: हिंदू धर्मग्रंथों में प्रयागराज को 'तीर्थराज' यानी सभी तीर्थों का राजा कहा गया है। मत्स्य पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, सृष्टि की रचना से पूर्व ब्रह्मा जी ने इसी पावन भूमि पर 'अश्वमेध यज्ञ' संपन्न कराया था। इसी प्रथम यज्ञ के कारण इस स्थान का नाम 'प्रयाग' पड़ा, जहां 'प्र' का अर्थ प्रथम और 'याग' का अर्थ यज्ञ माना गया है। यही वजह है कि प्रयागराज को सनातन परंपरा में विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है।

अमृत की बूंदों से जुड़ा माघ मेले का रहस्य

माघ मेला प्रयागराज में क्यों लगता है, इसका सबसे बड़ा कारण पौराणिक कथाओं में अमृत की बूंदों से जुड़ा है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों में संघर्ष हुआ था। इसी छीना-झपटी में अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में गिरीं। माघ मास में प्रयागराज के संगम का जल साक्षात अमृत के समान हो जाता है, इसलिए यहां स्नान को मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।

कल्पवास: तप, त्याग और संयम की पराकाष्ठा

माघ मेले की सबसे विशिष्ट परंपरा 'कल्पवास' है। पूरे एक महीने तक संगम की रेती पर रहकर अत्यंत सात्विक और अनुशासित जीवन जीने को कल्पवास कहा जाता है। कल्पवासी भूमि पर शयन करते हैं, दिन में केवल एक बार भोजन ग्रहण करते हैं और प्रतिदिन तीन बार गंगा स्नान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि माघ मास में संगम तट पर जप-तप और साधना करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति प्राप्त होती है।

माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान पर्व

साल 2026 में माघ मेले की भव्यता इन प्रमुख स्नान पर्वों पर देखने को मिलेगी:

  • मकर संक्रांति: सूर्य के उत्तरायण होते ही मेले की विधिवत शुरुआत होती है।
  • मौनी अमावस्या: सबसे बड़ा स्नान पर्व, जिसमें मौन रहकर साधना का विशेष महत्व है।
  • बसंत पंचमी: मां सरस्वती के पूजन के साथ शाही स्नान जैसा दृश्य बनता है।
  • माघी पूर्णिमा: इसी दिन कल्पवास की पूर्णाहुति मानी जाती है।

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्व

आध्यात्मिक रूप से माघ मास को सकारात्मक ऊर्जा के संचय का काल माना जाता है। वहीं वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, इस समय गंगा जल में विशेष खनिज और औषधीय तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाने और त्वचा रोगों में लाभकारी होते हैं। कड़ाके की ठंड में ठंडे जल में स्नान करने से व्यक्ति की इच्छाशक्ति भी मजबूत होती है।

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