रविवार को खुल रहा है बद्रीनाथ धाम का पट, क्यों कहा जाता है इस स्थान को ‘धरती का बैकुंठ’
आपको बता दें, इस साल 4 मई को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने जा रहा है। ऐसे में बद्रीनाथ की यात्रा भी शुरू होने वाली है। हर कोई उत्तराखंड के चार धाम में से एक धाम बद्रीनाथ भी जाएंगे।
- Written By: सीमा कुमारी
बद्रीनाथ धाम (सौ.सोशल मीडिया)
Badrinath Dham: चार धाम यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। हिंदू धर्म में चार धाम यात्रा का विशेष महत्व है। यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। आपको बता दें, इस साल 4 मई को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने जा रहा है। ऐसे में बद्रीनाथ की यात्रा भी शुरू होने वाली है। हर कोई उत्तराखंड के चार धाम में से एक धाम बद्रीनाथ भी जाएंगे।
यहां पहुंचकर वो भगवान विष्णु के दर्शन करेंगे। बद्रीनाथ को लोग वैकुण्ठ भी कहते हैं। लेकिन ऐसा क्यों इसको लेकर हर किसी के दिल में सवाल आता है। आइए आपको भी बताते हैं बद्रीनाथ धाम को वैकुण्ठ क्यों कहते हैं। साथ ही, इस स्थान की क्या महत्ता है।
बद्रीनाथ धाम को क्यों कहते हैं वैकुण्ठ
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, बद्रीनाथ धाम चार धामों में काफी महत्व रखता है। इसलिए इसे धरती का वैकुण्ठ भी कहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां पर भगवान विष्णु निवास करते हैं। हिंदू धर्म में इसलिए प्रमुख धाम का स्थान दिया गया है।
ऐसा कहा जाता है कि अगर व्यक्ति अपने जीवन में बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है, तो उसे जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। इसका मतलब होता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी। इसलिए इसे दिव्य लोक भी कहते हैं। यहां पर भगवान साक्षात्कार करते हैं।
कौन से भगवान की मूर्ति है बद्रीनाथ में जानिए
आपको बता दें, बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु बद्री नारायण के रूप में विराजमान हैं। यहां पर उनकी एक मीटर ऊंची काले पत्थर की स्वयंभू मूर्ति स्थापित है, जिसे आदि शंकराचार्य ने नारद कुंड से निकालकर स्थापित की थी।
इस मूर्ति को देखकर आपको लगेगा जैसे भगवान पद्मासन मुद्रा में ध्यानमग्न होकर बैठे हैं। उनके दाहिनी ओर कुबेर, लक्ष्मी और नारायण की मूर्तियां भी स्थापित की गई है। यह मूर्ति भगवान विष्णु की आठ स्वयं प्रकट हुई प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है। आपको इस मूर्ति के पास बस दीये जले हुए दिखाई देंगे।
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कैसे करें बद्रीनाथ धाम में दर्शन
बद्रीनाथ धाम में दर्शन के लिए आपको सुबह उठकर गर्म कुंड में स्नान करना है।
गर्म कुंड में स्नान करने के बाद फिर आपको नए कपड़े पहनने चाहिए।
फिर आदि ईश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करने चाहिए।
इसके बाद वहां पर मिलने वाले प्रसाद को लेकर भगवान के दर्शन करें।
बद्रीनाथ मंदिर अलकनंदा नदी और पर्वतों के बीच स्थित है।
