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Indian Culture: भारतीय महिलाएं क्यों पहनती हैं नथ, पायल और बिछिया? जानें इन सदियों पुरानी परंपराओं का पीछे छिप

Indian Women Jewellery: भारतीय संस्कृति में हर छोटी-बड़ी चीज का मतलब है। ऐसे ही भारतीय महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली पारंपरिक गहनों के पीछे भी कई छिपी हुई मान्यताएं हैं।

  • Written By: रीता राय सागर
Updated On: Jul 13, 2026 | 09:47 AM

भरातीय संस्कृति (फोटो.सोशल मीडिया)

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Cultural Significance Of Jewellery: भारत परंपराओं का देश है और यहां महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाले छोटे-से-छोटे गहने में भी गहन अर्थ छिपा है। भारतीय महिलाएं सदियों से नथ, पायल और बिछिया पहनती आ रही हैं। ये केवल सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि इनके सांस्कृतिक, भावनात्मक और प्रतीकात्मक कारण भी होते हैं।

ये गहने सिर्फ फैशन नहीं हैं। इनका अर्थ पहचान, शादी और सेहत व आध्यात्म से जुड़ी मान्यताओं से हैं। हालांकि आज के दौर में कई परंपराएं बदल गई हैं, फिर भी भारतीय संस्कृति में इन गहनों का एक खास स्थान है।

आइए जानते हैं इन गहनों के बारे में

नथ

नाक की बाली, जिसे ‘नथ’ भी कहा जाता है, भारतीय महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले सबसे खूबसूरत गहनों में से एक है। भारत के कई हिस्सों में यह शालीनता, सुंदरता और परंपरा का प्रतीक है। दुल्हनें, खासकर शादी के समय, सजी-धजी और बड़े आकार की नथ पहनती हैं। कई पारंपरिक मान्यताओं में नथ को महिलाओं की सेहत से भी जोड़ा जाता है। आयुर्वेद से प्रेरित पुरानी मान्यताओं और रिवाजों के अनुसार, नाक के बाएं नथुने में छेद करवाने से महिलाओं की प्रजनन से जुड़ी सेहत बेहतर रहती है और बच्चे के जन्म के समय होने वाली तकलीफ कम होती है। हालांकि आधुनिक मेडिकल साइंस इन दावों की पुष्टि नहीं करता, फिर भी कई समुदायों में यह मान्यता आज भी बनी हुई है।

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भरातीय संस्कृति (फोटो.सोशल मीडिया)

नथ का भावनात्मक महत्व भी है। कुछ परिवारों में यह परिवार के गौरव, परंपरा और महिला के अपनी जड़ों से जुड़ाव को दर्शाती है। आज, कई महिलाएं फैशन के तौर पर भी नथ पहनती हैं, साथ ही वे इसके सांस्कृतिक महत्व को भी मानती हैं।

पायल

पायल, भारतीय महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले पारंपरिक गहनों में से एक हैं। इनकी हल्की खनकती आवाज को लंबे समय से सुंदरता और नारीत्व से जोड़ा जाता रहा है। पुराने समय में, पायल की आवाज से किसी के कमरे में आने-जाने का पता चल जाता था, यह सम्मान दिखाने का एक तरीका था। चांदी की पायल ज्यादा लोकप्रिय हैं क्योंकि सोने को पारंपरिक रूप से पवित्र माना जाता है और आमतौर पर इसे कमर के नीचे नहीं पहना जाता। पायल की मधुर आवाज को अक्सर घरों में खुशी और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है।

भरातीय संस्कृति (फोटो.सोशल मीडिया)

कुछ लोगों का मानना ​​है कि पायल के हिलने और त्वचा पर दबाव पड़ने से रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। पायल पहनने का मकसद अच्छा दिखना और खुशी महसूस करना है। आजकल की यंग जेनेरेशन पायल इसलिए पहनती हैं, क्योंकि वे पुरानी परंपराओं को याद रखना चाहती हैं और साथ ही मॉडर्न कपड़ों के साथ स्टाइलिश भी दिखना चाहती हैं।

बिछिया

भारत में पैरों की उंगलियों में पहनी जाने वाली बिछिया का विशेष महत्व है। हिंदू परंपरा में इसे विवाहित महिलाओं के सबसे महत्वपूर्ण आभूषणों में से एक माना जाता है। आमतौर पर विवाह के समय बिछिया उपहार के रूप में दी जाती है और इसे दोनों पैरों की दूसरी उंगली में पहना जाता है।

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, बिछिया पहनने से महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। ऐसा माना जाता है कि पैरों की उंगलियों में पहनी जाने वाली बिछिया कुछ विशेष नसों पर हल्का दबाव बनाती है, जिनका संबंध गर्भाशय और मासिक धर्म चक्र से माना जाता है। अधिकांश महिलाओं के लिए यह केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि विवाह, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जिसका महत्व इसकी सुंदरता से कहीं अधिक है।

ये भी पढ़ें- Hindu Mantras: भाग्य बदलने वाले 5 भूले-बिसरे हिंदू मंत्र, जिनके नियमित जाप से जीवन में आती है खुशहाली

सबसे बढ़कर, बिछिया जिम्मेदारी, प्रेम और जीवन के नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। यह महिलाओं को परिवार और वैवाहिक रिश्ते से उनके जुड़ाव की याद दिलाती है और भारतीय परंपरा व सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है।

भरातीय संस्कृति (फोटो.सोशल मीडिया)

आज के समय में कई महिलाएं इन गहनों को परंपरा और फैशन, दोनों रूप में अपनाती हैं। कुछ महिलाएं अपनी सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिए इन्हें पहनती हैं, जबकि कुछ को इनका आकर्षक रूप पसंद आता है। वजह चाहे जो भी हो, इन पारंपरिक आभूषणों का आकर्षण आज भी समय के साथ कायम है।

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Published On: Jul 13, 2026 | 09:47 AM

Topics:  

  • Indian History
  • Religion News
  • Sanatana Dharma
  • Tribal Women
  • Women Health

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