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होलिका दहन की शुरुआत पाकिस्तान में क्यों हुई थी? क्या है इसका इतिहास? जानिए फैक्ट्स

Holika Dahan Original Place: होलिका दहन की शुरुआत पाकिस्तान से क्यों मानी जाती है? इसके पीछे जुड़े पौराणिक इतिहास, प्रह्लाद कथा और ऐतिहासिक तथ्यों को जानें विस्तार से।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Feb 28, 2026 | 03:38 PM

होलिका दहन (सौ.सोशल मीडिया)

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Holika Dahan In Pakistan: रंगों का त्योहार होली से महज एक दिन पहले होलिका दहन का पर्व पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का दिव्य प्रतीक और भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का भी जीवंत प्रमाण है। इस बार रंगों का त्योहार होली 4 मार्च को मनाया जाएगा।

पाकिस्तान में आज भी वह स्थान मौजूद है, जहां होलिका ने भक्त प्रह्लाद को जलाकर भस्म करने की कोशिश की थी। इसे प्रह्लाद कुंड कहा जाता है, जो ऐतिहासिक और पौराणिक घटना का साक्षी है।

पाकिस्तान में कहां पर है प्रह्लाद कुंड?

जानकारों के अनुसार, पाकिस्तान में प्रहलाद कुंड जिसे प्रहलादपुरी मंदिर के रूप में जाना जाता है। यह पंजाब प्रांत के मुल्तान शहर में बहाउद्दीन ज़कारिया के मकबरे के पास स्थित है। यह प्राचीन हिंदू मंदिर मुल्तान किले के अंदर एक ऊंचे मंच पर स्थित है जो भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित है।

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इस स्थान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां इस प्रकार हैं

  • स्थान

यह मंदिर मुल्तान के प्राचीन किले (Multan Fort) के अंदर, बहाउद्दीन जकारिया के मकबरे के ठीक बगल में एक ऊंचे चबूतरे पर स्थित है।

  • धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह स्थान है जहाँ भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था। माना जाता है कि होलिका दहन की परंपरा भी इसी स्थान से शुरू हुई थी।

  • वर्तमान स्थिति

1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस की प्रतिक्रिया में भीड़ ने इस मंदिर को काफी नुकसान पहुँचाया था। वर्तमान में यह मंदिर खंडहर अवस्था में है।

भारत में कहां पर है प्रह्लाद कुंड

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, हरदोई में स्थित प्रह्लाद कुंड एक पावन स्थल है, जहाँ भक्त प्रह्लाद का अद्भुत चमत्कार हुआ था।

यह कुंड आज भी भक्ति और ईश्वरीय शक्ति की याद दिलाता है। हरदोई शहर से थोड़ी दूरी पर स्थित यह स्थल आसानी से पहुंचा जा सकता है और यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी आस्था और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए इसे विशेष महत्व देते हैं।

यह भी पढ़ें:-नरसिंह द्वादशी पूजा की क्या है महिमा? जानिए सबसे शुभ मुहूर्त

अलौकिक शक्ति होती है महसूस

यह कुंड न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह लोगों को सिखाता भी है कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा से कोई भी बाधा पार की जा सकती हैं। मान्यता है कि श्रद्धालु अगर प्रह्लाद कुंड के दर्शन करें तो वे उस अलौकिक शक्ति को महसूस कर सकते हैं और उनकी सभी समस्याओं का नाश होता हैं।

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Published On: Feb 28, 2026 | 03:38 PM

Topics:  

  • Holi
  • Religion News
  • Sanatan Culture

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