Adhik mass 2026: 15 जून को समाप्त होगा अधिक मास, उससे पहले कर लें इस जगह की परिक्रमा; मिलेगा विशेष पुण्य
Adhik Mass: अधिक मास, पुरुषोत्तम मास या मलमास का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है। वर्ष 2026 में यह पवित्र मास 15 जून को समाप्त होने जा रहा है। इस दौरान किए गए सत्कर्मों का विशेष फल मिलता है।
- Written By: रीता राय सागर
अधिकमास (फोटो.सोशल मीडिया)
Purushottam Mass: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास को सांसारिक और मांगलिक कार्यों की तुलना में आध्यात्मिक साधना के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है। यही कारण है कि इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार या नए व्यापार की शुरुआत जैसे शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। हालांकि अधक मास अशुभ काल की श्रेणी में नहीं आता है, बल्कि इसे आत्मिक उन्नति और पुण्य अर्जित करने के विशेष अवसर के रूप में देखा जाता है।
श्री हरि विष्णु को अधिक मास का स्वामी कहा जाता है, इसलिए इस दौरान उनकी उपासना की जाती है। भगवान विष्णु ने इस अतिरिक्त मास को अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ दिया था, इसलिए इसे पुरुषोतम कहा जाता है।
क्यों लगता है अधिक मास
जैसे अंग्रेजी कैलेंडर में लीप ईयर होता है, वैसे ही हिंदी कैलेंडर में अधिक मास यानी पूरे एक महीने का अधिक मास लगता है। साल 2026 में जेठ में दो महीने लगे है। हिंदू धर्म में त्योहार ऋतुओं के हिसाब से भी लगता है। अधिक मास इसलिए भी लगता है, क्योंकि पंचांग और ऋतुओं के बीच का तालमेल बना रहे। यदि अधिक मास न लगे, तो त्योहार और ऋतुओं के बीच का सामंजस्य बिगड़ जाएगा। जैसे कि, दीपावली और छठ जैसे पर्व सर्दियों की शुरुआत में पड़ते हैं, तो वहीं रामनवमी गर्मी के मौसम में और सावन का महीना वर्षा ऋतु में होता है। वसंत में बसंत पंचमी मनाई जाती है।
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एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है और सौर वर्ष 365 दिनों का। इस तरह से देखे, तो दोनों के बीच 11 दिनों का अंतर होता है और तीन साल में यह अंतर 33 दिनों का हो जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।
मलमास में परिक्रमा से मिलता है शुभ फल
मलमास में ब्रज क्षेत्र की 84 कोस की परिक्रमा को अश्वमेध यज्ञ के बराबर फलदायी माना गया है। ब्रज भूमि के हर कोने में श्रीकृष्ण और राधा रानी की लीलाओं की कहानियां बसती हैं। वाराह पुराण के अनुसार धरती पर मौजूद 66 अरब तीर्थ मलमास के दौरान ब्रज में निवास करते हैं। इसलिए इस दौरान ब्रज परिक्रमा का खास महत्व होता है और मोक्ष की प्राप्ति के द्वार खुलते हैं।
अधिक मास में दान से मिलता है मोक्ष
अधिकमास को दान, पुण्य और सेवा भाव का महीना भी कहा जाता है। सनातन धर्म के अनुसार इस दौरान अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा, जरूरतमंदों की सहायता और धार्मिक ग्रंथों का पाठ शुभ माना जाता है। कई लोग इस समय व्रत रखते हैं और नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता या श्रीमद्भागवत का पाठ करते हैं। अधिक मास के दौरान कई परिवारों में रोजाना दीपदान और तुलसी पूजा भी किया जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
मलमास में इन मंत्रों के जाप से मिलेगा सौभाग्य
पौराणिक मान्यता के अनुसार पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करते हुए उनके पावन मंत्रों का जप करना चाहिए। इससे सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मलमास में भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए साधक को प्रतिदिन पूजा में तुलसी की माला से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए।
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क्या है 33 मालपुओं के दान का महत्व
सनातन परंपरा में 33 कोटि देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। यही कारण है कि पुरुषोत्तम मास में 33 मालपुआ बनाकर मंदिर में कुछ दश्रिणा के साथ दान किया जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार मलमास में मालपुआ का यह दान भूमिदान के समान पुण्यदायी होता है। पुरुषोत्तम मास में मालपुआ का दान तब और भी ज्यादा शुभ और फलदायी हो जाता है, जब यह अधिक मास की एकादशी, द्वादशी, पूर्णिमा या फिर अमावस्या पर किया जाता है। मालपुआ को बनाने के बाद पहले इसे भगवान विष्णु को भोग चढ़ाएं।
