

दिवाली पर मुख्य द्वार को तोरण और बंदनवार से सजाने की परंपरा है।
आम के पत्तों का तोरण शुभता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
अशोक के पत्तों को मंगल और प्रसन्नता से जोड़कर देखा जाता है।
गेंदे के पीले और नारंगी फूलों से बने तोरण त्योहार की सजावट में खास हैं।
फूलों के अलावा कपड़े, मोतियों और लकड़ी के कृत्रिम तोरण भी लगा सकते हैं।
Diwali Main Door Decoration : दिवाली पर घर की सफाई और सजावट के साथ मुख्य द्वार पर तोरण लगाने की भी खास परंपरा है। त्योहार के दिनों में कई घरों के दरवाजे आम के पत्तों, अशोक के पत्तों और गेंदे के फूलों से बने तोरण से सजाए जाते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली पर तोरण क्यों लगाया जाता है और कौन-सा तोरण शुभ माना जाता है? धार्मिक मान्यताओं में तोरण को स्वागत, मंगलकामना और सकारात्मक वातावरण का प्रतीक माना गया है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी परंपरा और इसका महत्व।
हिंदू परंपरा में तोरण को शुभ अवसरों पर घर के प्रवेश द्वार पर लगाने की प्रथा रही है। इसे अतिथियों और देवी-देवताओं के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। दिवाली पर मां लक्ष्मी के स्वागत की कामना के साथ मुख्य द्वार को साफ करके सजाया जाता है।
मान्यता है कि सुंदर और स्वच्छ प्रवेश द्वार घर में मंगलमय वातावरण का संदेश देता है। यही वजह है कि दीपावली के समय तोरण और बंदनवार से घर सजाने की परंपरा देखने को मिलती है।
दिवाली पर आम के पत्तों, अशोक के पत्तों और गेंदे के फूलों से बने तोरण विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। आम के पत्तों को शुभता और नई शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। अशोक के पत्ते धार्मिक आयोजनों में मंगल के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। वहीं, गेंदे के पीले और नारंगी फूल पूजा-पाठ और त्योहारों की सजावट में खास स्थान रखते हैं। आप अपनी पसंद और उपलब्धता के अनुसार इनमें से कोई भी तोरण चुन सकते हैं।
तोरण लगाने से पहले दरवाजे की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद दरवाजे की चौड़ाई के अनुसार तोरण चुनें, ताकि वह सुंदर और व्यवस्थित दिखाई दे। प्राकृतिक पत्तों और फूलों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो ताजे और साफ फूल-पत्ते लें। तोरण को इस तरह लगाएं कि दरवाजा खोलने और बंद करने में परेशानी न हो।
आजकल बाजार में कपड़े, मोतियों, लकड़ी और अन्य सजावटी सामग्रियों से बने कई तरह के तोरण मिलते हैं। प्राकृतिक फूल या पत्ते उपलब्ध न हों, तो कृत्रिम तोरण भी अच्छा विकल्प हो सकता है। इसे घर की सजावट, रंगों और अपने बजट के अनुसार चुन सकते हैं।
दिवाली पर तोरण लगाना केवल घर सजाने का तरीका नहीं, बल्कि स्वागत, उल्लास और शुभकामना से जुड़ी सांस्कृतिक परंपरा भी है। इसका उद्देश्य त्योहार के अवसर पर घर को सुंदर बनाना और खुशियों का माहौल तैयार करना है। इसलिए तोरण चाहे फूलों का हो या सजावटी सामग्री का, उसे श्रद्धा और प्रसन्नता के साथ लगाना ही इस परंपरा का खास भाव है।