

दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा में खील-बताशे चढ़ाने की परंपरा है।
खील धान से तैयार की जाती है और इसे नई फसल तथा अन्न का प्रतीक माना जाता है।
खील को अन्न, समृद्धि और अच्छी पैदावार से जोड़कर देखा जाता है।
Maa Lakshmi Bhog: दिवाली का त्योहार आते ही घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पूजा के लिए फूल, दीपक, मिठाई, फल और कई तरह की पारंपरिक चीजें खरीदी जाती हैं। इन्हीं में खील-बताशे का प्रसाद भी विशेष स्थान रखता है।
दिवाली के बाजारों में खील, बताशे और चीनी से बने छोटे खिलौने आसानी से देखने को मिल जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लक्ष्मी पूजन में खील-बताशे चढ़ाने की परंपरा क्यों निभाई जाती है? इसके पीछे नई फसल, अन्न और सुख-समृद्धि से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं दिवाली पर खील-बताशे का प्रसाद चढ़ाने का महत्व।
हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। दिवाली की रात उनकी विशेष पूजा की जाती है। इस अवसर पर खील-बताशे अर्पित करना कई परिवारों की पारंपरिक पूजा का हिस्सा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, खील और बताशे अन्न, मिठास तथा खुशहाली के प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें अर्पित करके परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
खील मुख्य रूप से धान से तैयार की जाती है। भारतीय संस्कृति में अन्न को जीवन का आधार और ईश्वर का प्रसाद माना गया है। दिवाली का समय कई क्षेत्रों में नई फसल के आगमन से भी जुड़ा होता है। ऐसे में खील को अन्न के प्रति आभार व्यक्त करने और अच्छी पैदावार की खुशी बांटने का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि लक्ष्मी पूजन में इसका विशेष स्थान है।
बताशे चीनी से तैयार किए जाने वाले पारंपरिक प्रसाद हैं। इनका सफेद रंग सादगी और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। पूजा में बताशे चढ़ाने के पीछे मिठास और प्रसन्नता से जुड़ी लोक मान्यताएं भी हैं। इन्हें अर्पित करके लोग अपने परिवार और जीवन में प्रेम, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं।
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद खील-बताशे परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों में बांटे जाते हैं। भारतीय परंपरा में प्रसाद बांटना खुशी और शुभकामनाएं साझा करने का माध्यम माना जाता है। इससे त्योहार में आपसी प्रेम और अपनापन भी बढ़ता है।
दिवाली पर खील-बताशे चढ़ाने की परंपरा केवल पूजा सामग्री तक सीमित नहीं है। यह अन्न के सम्मान, प्रकृति के प्रति आभार और जीवन में मिठास बनाए रखने का संदेश भी देती है। इसलिए इस दिवाली मां लक्ष्मी को खील-बताशे अर्पित करते समय इस परंपरा के भाव को समझना भी महत्वपूर्ण है।