

छठ पूजा 2026 का पर्व 13 नवंबर से 16 नवंबर तक मनाया जाएगा।
छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की विशेष उपासना की जाती है।
इस पर्व में ठेकुआ, फल, नारियल और गन्ने का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है।
चावल के लड्डू को कई जगह कसार के नाम से जाना जाता है।
चावल के लड्डू का प्रसाद नई फसल से जुड़ी पारंपरिक मान्यता का प्रतीक माना जाता है।
Chhath Maiya Prasad Significance: चार दिवसीय छठ पूजा इस साल 2026 13 नवंबर से शुरु होकर आगामी 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के साथ प्रसाद का भी विशेष महत्व होता है। इस पर्व पर ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना और कई पारंपरिक पकवान चढ़ाए जाते हैं। इन्हीं में एक खास प्रसाद है चावल के लड्डू, जिन्हें कई जगह कसार के नाम से भी जाना जाता है।
यह प्रसाद खासतौर पर नई फसल से जुड़ी परंपरा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में सवाल है कि छठ पूजा में चावल के लड्डू क्यों बनाए जाते हैं और इन्हें भोग में शामिल करने के पीछे क्या धार्मिक मान्यता है? आइए जानते हैं।
छठ पूजा में चावल के लड्डू बनाने की परंपरा का संबंध नई फसल से माना जाता है। कार्तिक महीने के आसपास धान की नई फसल तैयार होती है। ऐसे में किसान और परिवार नए चावल से प्रसाद बनाकर सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित करते हैं। इसे प्रकृति और अन्न के प्रति आभार व्यक्त करने का एक पारंपरिक तरीका माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, नई फसल से तैयार अनाज को सबसे पहले भगवान को समर्पित करना शुभ माना जाता है। छठ पूजा में चावल के लड्डू इसी भावना को दर्शाते हैं। सूर्य देव को फसलों और जीवन के लिए ऊर्जा देने वाला माना जाता है। इसलिए नई उपज से तैयार प्रसाद अर्पित करके उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। यह परंपरा खेती-किसानी और प्रकृति के साथ छठ पर्व के जुड़ाव को भी दिखाती है।
छठ पूजा में चावल के लड्डू को कई क्षेत्रों में कसार कहा जाता है। इसे आमतौर पर चावल के आटे और गुड़ या चीनी की मदद से तैयार किया जाता है। कुछ परिवार इसमें घी और अन्य पारंपरिक सामग्री भी मिलाते हैं। इसे छोटे-छोटे गोल आकार में बनाया जाता है। हालांकि, इसे बनाने की सामग्री और तरीका अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों की परंपरा के अनुसार बदल सकता है।
छठ पूजा के दौरान तैयार किए गए चावल के लड्डू पूजा की सामग्री के साथ सूप या डाला में रखे जाते हैं। इन्हें सूर्य देव को अर्घ्य देते समय अन्य प्रसाद के साथ अर्पित किया जाता है। पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद परिवार और अन्य लोगों में बांटा जाता है।
छठ पर्व में प्रसाद केवल पूजा की सामग्री नहीं, बल्कि श्रद्धा, स्वच्छता और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक भी है। ठेकुआ, कसार, फल और गन्ने जैसी चीजें इस पर्व की पारंपरिक पहचान हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रसाद की सूची बदल सकती है, लेकिन सभी का भाव सूर्य देव और छठी मैया के प्रति आस्था और धन्यवाद व्यक्त करना है।