जगन्नाथ मंदिर में अविवाहित जोड़े के नहीं जाने के पीछे का रहस्य क्या है, और जानिए किसने रोका था राधा जी को मंदिर में जाने से

ओडिशा के पुरी का जगन्‍नाथ मंदिर कई मायनों में खास है। इस मंदिर से जुड़े रोचक तथ्‍यों में एक यह भी है कि यहां अविवाहित जोड़ों को मंदिर में जाने की सख्त मनाही है।
जगन्नाथ मंदिर में अविवाहित जोड़े के नहीं जाने के पीछे का रहस्य क्या है, और जानिए किसने रोका था राधा जी को मंदिर में जाने से
अविवाहित जोड़ों के प्रवेश की मनाही (सौ.सोशल मीडिया)
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पुरी की जगन्नाथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक है, जो हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होकर दशमी तिथि तक चलती है। इस बार यह यात्रा 27 जून से शुरू होकर 5 जुलाई को समाप्त होगी।

लोगों का मानना है कि इस यात्रा में शामिल होना और भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने से जीवन के सभी दुख और परेशानियां दूर हो जाती हैं और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।

आपको बता दें, श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा इस दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा की रथ यात्रा निकाली जाती है। रथ में सवार होकर तीनों भाई-बहन गुड़िचा मंदिर जाते हैं और फिर 11वें दिन वहां से उनकी वापसी होती है।

भगवान जगन्नाथ मंदिर से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं जो कि आज भी लोगों को हैरान करते है। इसलिए इस मंदिर को भारत का एक रहस्यमयी मंदिर कहा जाता है। जगन्नाथ मंदिर के बारे में हैरान करने वाली बात है कि इस मंदिर में अविवाहित जोड़ों का जाना वर्जित माना गया है। ऐसे में यहां आइए जानते हैं इसके पीछे छिपे कारण के बारे में।

जगन्नाथ मंदिर में क्यों नहीं जाते अविवाहित जोड़े जानिए

आपको बता दें, जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर मान्यता है कि इस यात्रा में शामिल होने वाले भक्तों को 100 यज्ञों के बराबर का पुण्य मिलता है। इसलिए इस यात्रा में शामिल होने के लिए भक्तों की भारी भीड़ यहां पहुंचती है। जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी कई ऐसी बातें व नियम हैं जिनका आज भी पालन किया जाता है। कहते हैं कि जगन्नाथ मंदिर में अविवाहित जोड़ों को प्रवेश नहीं करना चाहिए।

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पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राधा रानी ने जगन्नाथ मंदिर जाकर भगवान जगन्नाथ जी के दर्शन की इच्छा जाहिर की। इस इच्छा के साथ वह जगन्नाथ मंदिर पहुंच भी गईं लेकिन जैसे ही उन्होंने मंदिर में प्रवेश के लिए कदम बढ़ाया तो पुजारी ने उन्हें द्वार पर ही रोक दिया। पुजारी के इस बर्ताव से राधा जी हैरान हुईं और इसका कारण पूछा?

तब पुजारी ने कहा कि, देवी आप भगवान श्रीकृष्ण की प्रेमिका हैं उनकी विवाहिता नहीं है। जिसे सुनकर राधा रानी काफी क्रोधित हुईं और उन्होंने पुजारी को श्राप दिया कि आज के बाद अगर कोई अविवाहित जोड़ा एक साथ इस मंदिर में प्रवेश करेगा तो उसके जीवनभर प्रेम प्राप्त नहीं होगा। कहते हैं कि राधा जी के इसी श्राप की वजह से आज भी कोई अविवाहित जोड़ा जगन्नाथ मंदिर में एक साथ दर्शन के लिए नहीं जाता है।

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