तनोट माता मंदिर(सौ.सोशल मीडिया)
Tanot Mata temple:कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा 26 भारतीय टूरिस्ट्स को बेहरहमी से हत्या के बाद भारत पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव की स्थिति बनी हुई। भारत-पाकिस्तान में जारी तनाव के बीच जैसलमेर का ‘तनोट माता मंदिर’ एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
यह वही मंदिर है, जहां पर 1965 की जंग में पाकिस्तान के 450 बम गिरे थे लेकिन एक भी नहीं फटे। इस मंदिर के चमत्कारों को स्थानीय लोग ही नहीं BSF के जवान भी मानते हैं। किसी भी जंग में जाने से पहले इस मंदिर में माथा टेकना यहां की परंपरा है। आइए जानते हैं माता के इस मंदिर के बारे में।
मंदिर कहां है स्थित
प्राप्त जानकारी के अनुसार, माता का मंदिर राजस्थान के जैसलमेर में स्थित है, जिसका नाम ‘तनोट माता मंदिर’ है। मंदिर के ट्रस्ट की आधिकारिक साइट के अनुसार, जब 1965 में भारत-पाक युद्ध का युद्ध हुआ था, उस दौरान पाकिस्तान ने 3 हजार बम मंदिर और उसके आस-पास के इलाके में बरसाए थे, लेकिन माता का चमत्कार ऐसा था कि मंदिर को खरोंच तक नहीं आई थी।
हमारी भारतीय सेना के लिए बेहद खास है यह मंदिर
आपको बता दें, साल 1971 के भारत-पाक युद्ध में सैकड़ों पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया और भारत को जीत मिली। बताया जाता है कि, माता तनोट की कृपा से पड़ोसी देश के सैकड़ों टैंक व गाड़ियों को भारतीय फौजों ने तबाह कर दिया था, जिसके बाद शत्रु दुम दबाकर भागने को विवश हो गए थे।
बता दें, आज तनोट मात का मंदिर भारतीय सैनिकों और सीमा सुरक्षा बल के जवानों के लिए आस्था का विशेष केंद्र है।
BSF के जवान मंदिर में करते हैं पूजा
तनोट माता का मंदिर भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) की निगरानी में आज भी सुरक्षित खड़ा है। इस मंदिर के गेट पर बीएसएफ के जवान तैनात रहते हैं। इसके अलावा सुबह-शाम दोनों टाइम बीएसएफ के जवान ही मंदिर में पूजा-आरती करते हैं। यह मंदिर फिलहाल, सभी श्रद्धालुओं के लिए खुला है। कोई भी व्यक्ति यहां तनोट माता का दर्शन कर सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, साल 1965 में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने यहां सीमा चौकी की स्थापना कर इस मंदिर की पूजा अर्चना व व्यवस्था का कार्यभार संभाला। वर्तमान में मंदिर का प्रबंधन संचालन तनोट राय एवं घंटियाली माता ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है।
बता दें, इस मंदिर में पूजा का जिम्मा भी सेना के पास ही है। सेना के अधिकारियों के अलावा दूर-दूर से लोग इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं। मंदिर पूरे सप्ताह सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक खुला रहता है।
हर ऑपरेशन से पहले तनोट माता आशीर्वाद
हर युद्ध या ऑपरेशन से पहले तनोट माता के मंदिर में माथा टेकना यहां कि परंपरा है। बीएसएफ और स्थानीय लोगों का इस मंदिर में अपार श्रद्धा है। यहां के लोगों का कहना है कि जैसलमेर की सुरक्षा तनोट माता करती हैं। इतने हमले होने के बाद भी सबकुछ सुरक्षित रहना सिर्फ माता की कृपा ही है।
बॉर्डर फिल्म में भी तनोट माता का जिक्र
भारतीय बॉलीवुड फिल्म बॉर्डर में भी इस मंदिर के बार में क्लिप दिखाई गई है, जिसमें दिखाया गया है कि किस तरह से बीएसएफ के जवान तनोट माता को पूजते हैं।
कैसे पहुंचे तनोट माता मंदिर
हवाई मार्ग
जैसलमेर का सबसे नजदीक जोधपुर एयरपोर्ट है, जहां से आप जैसलमेर पहुंचने के लिए कैब किराए पर ले सकते हैं। जैसलमेर के मुख्य शहर से, आप 2 घंटे में तनोट माता मंदिर पहुंच सकते हैं।
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रेल मार्ग
जैसलमेर रेलवे स्टेशन और तनोट माता मंदिर के बीच 123.1 किमी की दूरी है। जैसलमेर रेलवे के जरिए पहुंचा जा सकता है। जहां से आप टैक्सी रेंट पर लेकर मंदिर पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग
तनोट माता मंदिर तक जैसलमेर से सड़क मार्ग से सबसे अच्छी तरह पहुंचा जा सकता है। यात्रा में लगभग 1 घंटा 52 मिनट लगते हैं, और यह जैसलमेर से 120 किमी दूर स्थित है।