अप्रैल में इस दिन है परशुराम जयंती, जानिए सही डेट और शुभ योग
हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के अवतारों में से एक भगवान परशुराम की जयंती का बहुत अधिक महत्व है। आइए, परशुराम जयंती की सही डेट, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं-
- Written By: सीमा कुमारी
परशुराम जयंती (सौ.सोशल मीडिया)
Parshuram Jayanti 2025: हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के अवतारों में से एक भगवान परशुराम की जयंती का बहुत अधिक महत्व है। परशुराम जयंती हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली तृतीया तिथि पर रखा जाता है। इस बार यह पर्व 29 अप्रैल को है।
आपको बता दें कि, अक्षय तृतीया पर्व भी वैशाख माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली तृतीया तिथि पर ही मनाई जाती है। ऐसे में परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया पर्व एक साथ मनाया जाता है। इस तरह यह तिथि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
इस शुभ अवसर पर भगवान परशुराम की पूजा की जाती है। साथ ही मनोवांछित फल पाने के लिए पूजा होने तक व्रत रखा जाता है। भगवान परशुराम की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। आइए, परशुराम जयंती की सही डेट, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं-
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जानिए परशुराम जयंती 2025 शुभ मुहूर्त
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शुरू होगी और 30 अप्रैल को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी। भगवान परशुराम का अवतार प्रदोष काल में हुआ है। इसके लिए 29 अप्रैल को परशुराम जयंती मनाई जाएगी।
परशुराम जयंती 2025 पर बन रहे कई शुभ योग
परशुराम जयंती पर सौभाग्य योग का संयोग बन रहा है। सौभाग्य योग दोपहर 03 बजकर 54 मिनट तक है। इसके साथ ही त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। इन योग में भगवान परशुराम की पूजा करने से हर एक मनोकामना पूरी होगी। साथ ही साधक पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसेगी।
ऐसे करें भगवान परशुराम की पूजा
- परशुराम जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में जाग जाएं और विष्णु जी का ध्यान करें।
- इसके बात घर की साफ-सफाई कर नहा लें।
- अब सूर्य देव को जल का अर्घ्य अर्पित करें।
- इस दिन व्रत का संकल्प करें।
- इसके बाद भगवान परशुराम की विधि अनुसार पूजा शुरू करें।
- भगवान परशुराम को फूल, रोली अक्षत, भोग आदि आर्पित करें।
- प्रदोष काल में भगवान परशुराम की पूजा करना अति शुभ माना जाता है।
- शाम में पूजा के बाद साधक फलाहार कर सकते हैं।
- भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ, ऐसे में इस दिन प्रदोष काल में पूजा करने का विशेष महत्व होता है।
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