जनवरी 2025 में इस तिथि को मनेगी 'गुरू गोविंद सिंह जयंती', जानिए उनसे जुड़ी 5 विशेष बातें

गुरु गोबिंद सिंह जयंती हर साल पौष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। जिसे प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है। साल 2025 में गुरु गोबिंद सिंह की जयंती 6 जनवरी को पूरे देशभर में मनाई जाएगी।
जनवरी 2025 में इस तिथि को मनेगी 'गुरू गोविंद सिंह जयंती', जानिए उनसे जुड़ी 5 विशेष बातें
गुरु गोबिंद सिंह,(सौ.सोशल मीडिया)
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Guru Gobind Singh Jayanti 2025: सिख धर्म के दसवें और आखिरी गुरु गोबिंद सिंह जयंती हर साल पौष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को  मनाई जाती है। जिसे प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है। साल 2025 में गुरु गोबिंद सिंह की जयंती 6 जनवरी को पूरे देशभर में मनाई जाएगी।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि, गुरु गोबिंद सिंह जी केवल भारत के इतिहास में ही नहीं, बल्कि विश्व के सबसे महान व्यक्तित्वों में से एक माने जाते हैं। वे एक उत्कृष्ट दार्शनिक, लेखक, और कवि के साथ-साथ अद्वितीय रणनीतिकार और असाधारण योद्धा भी थे।

सिख धर्म के लोगों को एक अच्छी राह दिखाने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण उपदेश दिए हैं। आपको बता दें कि उन्होंने 5 महत्वपूर्ण बातें बताई है, जिसे सिख धर्म में पांच ककार कहा जाता है। इन 5 ककार आज भी पालन पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है। इसके बिना हर सिख एक प्रकार से अधूरा ही है।

गुरु गोबिंद सिंह की जयंती से अवसर पर हम आपको उनकी कुछ ऐसी बातें बता रहे हैं, जो आज भी मान्य हैं। जिसका सिख धर्म में बहुत महत्व है। ऐसे में आइए जानते हैं गुरु गोबिंद सिंह जी के अनमोल वचन-

जानिए गुरु गोबिंद सिंह जी के अनमोल वचन

1. जैसा की हमने आपको बताया है गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिखों के लिए पांच ककार का मंत्र दिया था। उन्होंने कहा था कि जो भी सिख होगा, उसके लिए पांच ककार केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा अनिवार्य होगा। ये पहनकर ही खालसा वेश पूर्ण माना जाता है। यह 5 महत्वपूर्ण चीजें सभी सिख परिधान करते हैं।

2. साथ ही समाज में धर्म और सत्य की स्थापना के लिए गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने हर सिख को रक्षा के लिए कृपाण धारण करने को कहा। इसलिए आज भी सिख कृपाण धारण करते है।

3. गुरु गोबिंद सिंह जी ने ही खालसा वाणी “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह” का उद्घोष किया था। सिख समुदाय के लोग आज भी इस वाणी का उद्घोष करते हैं। यह उद्घोष हम कई सालों से सुनते आ रहे है।

4. गुरु गोबिंद सिंह जी ने ही गुरु परंपरा को खत्म करते हुए सभी सिखों को गुरु ग्रंथ साहिब को अपना गुरु मानने का आदेश दिया। जिसके बाद से गुरु ग्रंथ साहिब ही सिखों के मार्गदर्शक हैं। इस प्रकार से गुरु गोबिंद साहिब सिखों के अंतिम गुरु थे।

5. गुरु गोबिंद सिंह जी बहादुरी की मिसाल थे। उनके लिए कहा जाता है “सवा लाख से एक लड़ाऊं चिड़ियों सों मैं बाज तड़ऊ तबे गोबिंदसिंह नाम कहाऊं”. उन्होंने सिखों को निडर रहने का संदेश दिया। आज भी सिख धर्म के सभी अनुयायी इन पांच महत्वपूर्ण बातों यानी ककार का पालन करते हैं।

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